रामलला प्राण-प्रतिष्ठा के साक्षी बने थे हिन्दुओं में हर जाति, विरादरी, संत समाज के लोग
Date : 01-Oct-2024
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर हरियाणा के चुनावी प्रचार के दौरान जो बोला, उसके बाद से लगातार देश भर में उनकी आलोचना हो रही है, एक तरफ जहां भाजपा आक्रामक है, तो दूसरी ओर संत समाज भी उनके इस बयान से खासा नाराज है । वहीं विश्व हिन्दू परिषद का कहना है कि हिन्दुओं को बांटने और वोट की राजनीति करनेवाला उनका यह बयान सच के नजदीक भी न होकर सिर्फ लोगों को गुमराह और भ्रम में डालनेवाला है। रामलला प्राण-प्रतिष्ठा में हिन्दुओं की हर जाति, विरादरी, संत समाज के लोग साक्षी बने हैं। हकीकत तो यह है कि राहुल गांधी अपने इस भाषण में राष्ट्रपति के मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा को भी गिराते हुए दिखे हैं ।
दरअसल, राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अयोध्या में मंदिर खोला, वहां अडाणी दिखे, अंबानी दिखे, पूरा बॉलीवुड दिख गया, लेकिन एक भी गरीब किसान नहीं दिखा। सच है… इसलिए तो अवधेश ने इनको पटका है। अवधेश वहां के एमपी हैं। इसलिए तो वो जीता है। सबने देखा, आपने राम मंदिर खोला, सबसे पहले आपने राष्ट्रपति से कहा कि आप आदिवासी हो। आप अंदर आ ही नहीं सकती, अलाउ नहीं है। आपने किसी मजदूर, किसान, आदिवासी को देखा, कोई नहीं था वहां। डांस-गाना चल रहा है। प्रेस वाले हाय-हाय कर रहे हैं, सब देख रहे हैं।’’
विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े एक पदाधिकारी ने नाम नहीं देने का आग्रह करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम के प्राण-पतिष्ठा आयोजन में अनुसूचित जाति, जनजाति झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों को भी बड़ी संख्या में बुलाया गया था। इसके अलावा, मंदिर निर्माण में लगे मजदूर और श्रमिकों को भी बतौर मेहमान बुलाया गया था। श्रमिकों पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्प वर्षा की थी। उनके श्रम को प्रणाम करते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया था। विहिप के इन पदाधिकारी का कहना है कि कार्यक्रम के लिए 150 श्रेणियों के सात हजार से अधिक लोगों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें संत, राजनेता, व्यवसायी, खेल जगत, कला जगत, अभिनेता, कवि, लेखक, साहित्यकार अनुसूचित जाति, जनजाति, घुमंतू जाति सेवा, प्रशासनिक, पुलिस, सेना के अधिकारी, कार सेवकों के परिवार, कुछ देशों के राजदूत आदि शामिल हुए थे ।