दीनदयाल शोध संस्थान की आत्मा : नानाजी देशमुख | The Voice TV

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दीनदयाल शोध संस्थान की आत्मा : नानाजी देशमुख

Date : 01-Oct-2024

"सर्वभूतहिते रता:" की जीवन दृष्टि से सभी प्राणियों के हित में अपना हित निहित करने वाले लोग संसार में विरले होते हैं। श्रीमद्भागवत गीता के बारहवें अध्याय के चौथे श्लोक के इसी पवित्र भावार्थ को लेकर कार्य करने वाले महामानव नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 में शरद पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्र के एक सामान्य  परिवार में हुआ। आप की माता राजाबाई और पिता अमृतराव देशमुख ने बड़े स्नेह से आपका नाम चंडिकादास अमृतराव देशमुख रखा। माता पिता  स्नेह से उन्हें नाना कहकर संबोधित करते थे।आगे चलकर यही नाम चंडिका दास अमृतराव देशमुख जी की पहचान बन गया। आपको माता पिता का बहुत कम सानिध्य मिला। आपदा में अवसर और अभाव में निर्माण करने के कौशल ने नाना जी को व्रती स्वयंसेवक के रुप में स्थापित कर दिया। आद्य सरसंघचालक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी ने नाना जी को संघ से जोड़ा था । नाना जी की संगठन क्षमता और लक्ष्य को प्राप्त करने की संकल्प शक्ति के कारण उन्हें संघ कार्य के विस्तार का दायित्व मिला। अपने प्रांत प्रचारक रहते हुए 1950 में , गोरखपुर में पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित किया था।

नानाजी का व्यक्तित्व एक विशुद्ध साधक का रहा।  डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सानिध्य में, नानाजी और पंडित दीनदयाल जी को साथ मिलकर कार्य करने का अवसर मिला। जहाँ से नाना जी , पंडित दीनदयाल जी एवम् उनके एकात्म मानववाद के दर्शन से प्रभावित हुए। इस जोड़ी में अटल बिहारी बाजपेई के रूप में एक ओजस्वी वक्ता एवं कवि भी जुड़ गये। इस त्रिमूर्ति ने भारतीय जनसंघ के रूप में राष्ट्रवादी विचार को उत्तर प्रदेश से प्रारंभ करके संपूर्ण भारत में प्रचारित किया। 
11 फरवरी 1968 को पंडित दीनदयाल जी के आकस्मिक निधन ने नाना जी को अंदर तक झकझोर दिया । नानाजी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद अंत्योदय के विषय को कार्य रूप में परिणित करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में "दीनदयाल शोध संस्थान" की स्थापना की। 20 अगस्त 1972 को भारतीय वैदिक परंपरा से परम पूजनीय गुरु जी के करकमलों से इस संस्थान का शुभारंभ किया गया। इस संस्थान ने 1978 में जन सहभागिता के आधार पर युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना का और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का प्रयोग प्रारंभ किया। जिसके लिए सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश के पिछड़े क्षेत्र गोंडा जिले का चयन किया गया। 25 नवंबर 1978 को गोंडा में तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम नीलम संजीव रेड्डी द्वारा ग्रामोदय प्रकल्प का विधिवत उद्घाटन करके ग्राम स्वराज के स्वप्न को साकार करने का श्री गणेश किया गया। 
26 जनवरी 2002 में आपके द्वारा चित्रकूट में चित्रकूट परियोजना एवं आत्मनिर्भरता के लिए अभियान प्रारंभ किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य चित्रकूट के  500 ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाना था । 15 अगस्त 2005 में साढ़े तीन वर्षों में ही यह लक्ष्य पूर्ण किया गया तथा वर्ष 2011 में चित्रकूट के आसपास के सभी गाँव को आत्मनिर्भर बना दिया गया।
ग्राम स्वराज और एकात्म मानववाद के ध्येय को पूर्ण करने में अपना संपूर्ण जीवन आहूत करने वाले राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने 95 वर्ष की आयु में 27 फरवरी 2010 को मंदाकिनी नदी के पावन तट पर बनी सियाराम कुटी से अपनी पारलौकिक यात्रा प्रारंभ की। जीवन पर्यंत समाज और राष्ट्रहित में कार्य करने वाले राष्ट्र संत ने अपनी मृत्यु के पश्चात् अपनी देह को चिकित्सकीय शोध के लिए दान कर दिया ।

 


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