राहुल गांधी अब राममंदिर के नाम पर हिन्दू समाज को बांटने की राजनीति पर उतर आए!
Date : 30-Sep-2024
राहुल गांधी इन दिनों जिस तरह के हिंदू समाज को बांटने का नैरेटिव गढ़ रहे हैं, कई बार उनकी बौद्धिक क्षमताओं पर हंसी आती है और अनेक प्रश्न भी खड़े होते हैं! क्या कोई ऐसा व्यक्ति लोकसभा में विपक्ष का नेता हो सकता है जिसे यह भी नहीं पता की भगवान के धाम में जब भक्त जाते हैं तो वह अपना अगला-पिछड़ा, ऊंचा-नीचा, जाति, भाषा, पंथ, अहंकार जैसे तमाम गुण-अवगुणों को छोड़कर सिर्फ एक भक्त के रूप में ही ईश्वर के समक्ष आराधना करने पहुंचते हैं । वहां ना कोई राजा होता है और नहीं कोई रंक, जो होते हैं, सिर्फ वह भगवान के भक्त होते हैं।
यहां पहले पूरे मामले को समझते हैं- अभी विधानसभा चुनाव का समय है, राहुल गांधी हरियाणा के हिसार में एक चुनावी रैली को सम्बोधित कर रहे होते हैं, यहां राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अयोध्या में मंदिर खोला, वहां अडाणी दिखे, अंबानी दिखे, पूरा बॉलीवुड दिख गया, लेकिन एक भी गरीब किसान नहीं दिखा। सच है... इसलिए तो अवधेश ने इनको पटका है। अवधेश वहां के एमपी हैं। इसलिए तो वो जीता है। सबने देखा, आपने राम मंदिर खोला, सबसे पहले आपने राष्ट्रपति से कहा कि आप आदिवासी हो। आप अंदर आ ही नहीं सकती, अलाउ नहीं है। आपने किसी मजदूर, किसान, आदिवासी को देखा, कोई नहीं था वहां। डांस-गाना चल रहा है। प्रेस वाले हाय-हाय कर रहे हैं, सब देख रहे हैं।’’
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के कहे अनुसार इस कार्यक्रम के लिए 150 श्रेणियों के 7000 से अधिक लोगों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें संत, राजनेता, व्यवसायी, खिलाड़ी, अभिनेता, कार सेवकों के परिवार आदि शामिल रहे। अब राष्ट्रपति उस कार्यक्रम में देश के अनेक लोगों, जिन्हें यहां कार्यक्रम में रहने के लिए आमंत्रण मिला था, उनकी अपनी अन्य व्यस्ताओं के कारण नहीं जा सकीं, जैसे ये सभी नहीं पहुंच पाए, तब इसका दोष क्या भाजपा का है? जैसा सभा में राहुल बोल रहे थे, किंतु राहुल गांधी यहां चुनावी रैली में मंच से जूठ फैला रहे हैं ! यह रिकार्ड में है और मीडिया के कई माध्यमों में यह मौजूद भी है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अनुसूचित जाति, जनजाति, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवार और मंदिर निर्माण में जुटे श्रमिकों तक को बतौर मेहमान कार्यक्रम में बुलाया था।
अब राहुल गांधी से पूछना चाहिए कि क्या ये भक्त जो अपने भगवान के दर्शन को अयोध्या इतनी बड़ी संख्या में आज भी पहुंच रहे हैं, वे क्या अपनी पहचान हाथ में लेकर घूमेंगे कि वे मजदूर हैं, श्रमिक हैं, देखो, देखो, हम रामलला के दर्शन करने आए है! अरे ऐ फैरी लगानेवाले, तिलक लगानेवाले, रिक्शा चलानेवाले भैया हम तो आ गए रामजी के दरबार में, जरा कोई राहुल जी को बता देना कि हम मजदूर हैं, हम किसान हैं, हम गरीब हैं, हम आदिवासी हैं और हम दलित हैं!
या यूं कहें कि देश में जितनी भी बड़ी समस्याएं आज दिखाई देती हैं, उन सभी में अधिकांश के पीछे यदि कोई है तो वह राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी ही है। यह आप जम्मू-कश्मीर की धारा 370, वक्फ बोर्ड कानून, देश में समान नागरिक संहिता न लाना, एक देश में दो कानून, इस्लाम के नाम पर शरिया कानून को मान्यता देना, देश के विभाजन के बाद जल नीति पर पाकिस्तान के सामने कमजोर पड़ जाना, अल्पसंख्यक की परिभाषा तय नहीं होने देना, जिसके चलते आज देश में 30 करोड़ की मुस्लिम आबादी होने के बाद भी वह अल्पसंख्यक होने का लाभ ले रही है। हिन्दू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण, शिक्षा में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षण संस्थाओं को विशेष छूट का प्रावधान, नियम बनाकर के देना, फिर भले ही वे इस योग्य हों या नहीं जैसे अनेक निर्णयों को देखा जा सकता है।