18 सितम्बर 1948 निजाम का समर्पण और हैदराबाद भारत का अंग बना
Date : 18-Sep-2024
108 घंटे लगे थे सैन्य अभियान में
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29, 30, 350ए तथा 350बी में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का प्रयोग किया गया है लेकिन इसकी परिभाषा कहीं नहीं दी गई है। यह विडंबनापूर्ण स्थिति है कि कहीं पर कोई समुदाय जो 96, 98 प्रतिशत है वह अल्पसंख्यक है और वहीं, किसी राज्य में 2 प्रतिशत आबादी वाले लोग बहुसंख्यक हैं और अल्पसंख्यक को मिलने वाले लाभ से वंचित हैं। संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार, ‘ऐसा समुदाय जिसका सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से कोई प्रभाव न हो और जिसकी आबादी नगण्य हो, उसे अल्पसंख्यक कहा जाएगा।’ किंतु क्या यह परिभाषा भारत में रह रहे मुसलमानों पर लागू होती है ? अल्पसंख्यक की अब तक कि परिभाषाएं उठाकर देखें, इनमें साफ है कि दो प्रतिशत या अधिकतम 10 प्रतिशत से कम कुल जनसंख्या का अल्पसंख्यक समुदाय कहलाएगा, पर भारत में मुसलमान जैसा कि वे स्वयं कहते हैं कि 20 करोड़ से अधिक हैं, जोकि स्वभाविक तौर पर कुल जनसंख्या का 14 प्रतिशत या इससे कुछ अधिक हो जाता है ।
दूसरी ओर राज्यीय स्तर पर भी इसकी समीक्षा की जाए तो हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आंकड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों और जम्मू कश्मीर में अल्पसंख्यक है। लक्षद्वीप में 96.20% और जम्मू-कश्मीर में 68.30% मुसलमान हैं, जबकि असम (34.20%), पश्चिम बंगाल (27.5%), केरल (26.60%), उत्तर प्रदेश (19.30%) और बिहार (18%) में भी इनकी अच्छी-खासी जनसंख्या है फिर भी इन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है और वे इसका लाभ ले रहे हैं। दूसरी ओर वे समुदाय, जो वास्तविक रूप से अल्पसंख्यक हैं, राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त न होने के कारण लाभ से वंचित हैं। विडम्बना देखिए; लक्षद्वीप में मात्र दो प्रतिशत हिंदू हैं लेकिन वे वहाँ अल्पसंख्यक न होकर बहुसंख्यक हैं और 96% प्रतिशत आबादी वाले मुसलमान अल्पसंख्यक हैं। ईसाई मिजोरम, मेघालय, नगालैंड में बहुसंख्यक हैं जबकि अरुणाचल प्रदेश, गोवा, केरल, मणिपुर, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल मे भी इनकी संख्या अच्छी है, इसके बावजूद ये अल्पसंख्यक माने जाते हैं। यह गैर-बराबरी है। इसे एड्रेस किये जाने की ज़रूरत है। किंतु हर उस मुद्दे में जिसमें न्यायालय को लगता है हस्तक्षेप करना चाहिए वह करती है, पर यहां इस मुद्दे पर वह अभी तक चुप नजर है।