प्रेरक प्रसंग:- दुर्गुणों का दुष्परिणाम Date : 17-Sep-2024 रावण मरा हुआ युद्धभूमि में पड़ा था | उसके मृत शरीर को देखने लक्ष्मणजी गए और लौटकर आने पर उन्होंने बताया कि रावण के शरीर में छलनी कि तरह असंख्य छिद्र हो रहे हैं | दल के वानरों ने जब लक्ष्मण से पूछा कि इतने छेद क्यों हुए, तो लक्ष्मण इतना ही कह सके कि राम के तीरों की वर्षा से ही ऐसा हुआ होगा | तब वे सब प्रभु रामचंद्रजी के पास गए | राम उनका प्रश्न सुनकर मुस्कुराये | उन्होंने कहा, “तीरों ने नहीं, रावण के दुर्गुणों ने उसके शरीर को छेदा है और वह महाबलशाली योद्धा अपने पापों के फलस्वरूप मरा है | हे लक्ष्मण! न शस्त्र किसी को मारते हैं, न शत्रु | मनुष्य स्वयं अपने दुर्गुणों से जर्जर होता रहता है और पाप का घड़ा भर जाने पर स्वयं ही नष्ट-भ्रष्ट हो जाता है |