ब्रम्हांड के प्रथम अभियंता और वास्तुकार भगवान् विश्वकर्मा
Date : 17-Sep-2024
भाद्रपद कन्या संक्रांति तदनुसार 17 सितंबर भगवान् विश्वकर्मा के अवतरण दिवस पर सादर समर्पित है |
सनातन धर्म शास्त्रों में भगवान् विश्वकर्मा के पाँच अवतार वर्णित हैं। ब्रह्मा के पुत्र अंगीरा ऋषि की सुपुत्री भुवना ब्रम्हवादिनी के सुपुत्र भगवान् विश्वकर्मा के रुप में सर्वश्रुत हैं। भगवान् विश्वकर्मा देवों के आदि अभियंता हैं। सनातन धर्म में प्रचलित एक और अवतार कथा में भगवान् विश्वकर्मा ब्रह्मा के सातवें पुत्र के रूप में पूज्य हैं। भगवान् विश्वकर्मा को सृष्टि के निर्माण की रूपरेखा व आकार देने वाले शिल्पकार और ब्रह्मांड के प्रथम अभियंता व यंत्रों के देवता के रुप में माना जाता है। विष्णु पुराण में विश्वकर्मा को देवताओं के वर्धकी अर्थात् काष्ठशिल्पी होने का वर्णन मिलता है।
भगवान् विश्वकर्मा आध्यात्मिक और भौतिक शक्ति के जानकार हैं। देवीय स्थिति, पंचतत्व , दस दिशायें, विद्युत चुंबकीय बल, गुरुत्व बल, सौर ऊर्जा, ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति के ज्ञाता हैं। सतयुग में स्वर्ग लोक इन्द्रलोक, भगवान् शिव के त्रिशूल का निर्माण,भगवान् विष्णु के सुदर्शन चक्र का निर्माण, यमराज के कालदंड का निर्माण और भूलोक का निर्माण, त्रेतायुग में पुष्पक विमान और लंका का निर्माण, इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि भगवान् विश्वकर्मा ने ही बताया था कि लंका का वास्तु बिगाड़ना होगा तभी नाश होगा इसलिए हनुमान जी ने लंका दहन किया।द्वापर में द्वारिका हस्तिनापुर, इन्द्रप्रस्थ और सुदामापुरी, इस युग में जगन्नाथ मंदिर और मूर्तियां तथा विश्व का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय "तक्षशिला" विश्वविद्यालय का निर्माण किया था। भगवान् विश्वकर्मा ने महर्षि दधीचि की अस्थियों से विभिन्न शस्त्रों के साथ माँ दुर्गा के भी सभी शस्त्रों का निर्माण किया था।