15 सितंबर विशेष:- अभियंता दिवस
Date : 14-Sep-2024
एम विश्वेश्वरैया की जयंती मनाने और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए योगदान को बताने के लिए हर साल 15 सितंबर को पूरे भारत में अभियंता दिवस मनाया जाता है। एम विश्वेश्वरैया का पूरा नाम मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया है। भारत के अलावा 15 सितंबर को श्रीलंका और तंजानिया में भी अभियंता दिवस मनाया जाता है।
एम विश्वेश्वरैया का जन्म साल 1861 में कर्नाटक के बेंगलुरु से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चिक्काबल्लापुर में एक तेलुगु परिवार में हुआ था। अपने गृहनगर में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद विश्वेश्वरैया मद्रास विश्वविद्यालय में बीए की पढ़ाई करने गए। हालांकि, बाद में उन्होंने पुणे में कॉलेज ऑफ साइंस से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। एम विश्वेश्वरैया बाढ़ आपदा प्रबंधन और सिंचाई तकनीकों में माहिर थे।उन्होंने पुणे के पास खडकवासला जलाशय में वाटर फ्लडगेट्स के साथ एक सिंचाई प्रणाली का पेटेंट कराया और स्थापित किया। एम विश्वेश्वरैया ने मैसूर के दीवान के रूप में शासन किया, जहां उन्होंने बैंगलोर कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की। 1917 में विश्वेश्वरैया ने कर्नाटक में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की, जिसे अब यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता है। एम विश्वेश्वरैया को 1955 में भारत रत्न पुरस्कार मिला।वे एक प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर, विद्वान और राजनेता थे, जिन्होंने भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वेश्वरैया के प्रसिद्ध योगदानों में से एक है कावेरी नदी पर बना कृष्णा राजा सागर बांध यह बांध उस समय के सबसे बड़े जलाशयों में से एक था और दक्षिण भारत के विकास में इसकी बड़ी भूमिका रही। ये परियोजना आज भी क्षेत्र में
कृषि और जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, सर एम. विश्वेश्वरैया ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में भी खूब काम किया। उन्होंने कई बांधों, पुलों और वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स का डिजाइन तैयार किया, जिससे भारत में एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट तेज हुआ। उन्होंने मुंबई के बंदरगाह क्षेत्र में बाढ़ से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया। ये भी उनकी महान उपलब्धियों में शुमार है। देश में टेक्निकल एजुकेशन को बढ़ावा देने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
अभियंता दिवस दुनिया में अलग-अलग देशों में अलग-अलग तारीखों में मनाया जाता है। वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे 4 मार्च को होता है, जिसे यूनेस्को ने घोषित किया था। हालांकि भारत में अभियंता दिवस का इतिहास करीब 56 साल पुराना है। पहली बार अभियंता दिवस 1968 में मनाया गया था। 1962 में एम विश्वेश्वरैया सर के निधन के बाद उनकी विरासत को आगे ले जाने और उनके योगदान के सम्मान में 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे घोषित किया गया था
अभियंता दिवस का का उद्देश्य छात्रों और युवाओं को साइंस, टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना है। इंजीनियर्स डे हमें यह याद दिलाता है कि कैसे टेक्निकल इनोवेशन और इंजीनियरिंग की मदद से हम आने वाली चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं