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कौन है पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले तीरंदाज हरविंदर सिंह

Date : 06-Sep-2024

हरविंदर सिंह ने बुधवार को पेरिस 2024 के पैरालंपिक में भारत के लिए पहला पैरालंपिक स्वर्ण पदक हासिल कर एक तीरंदाज के रूप में इतिहास रचे हैं |

हरविंदर ने फाइनल में पोलैंड के लुकास सिसजेक को 6-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह तीरंदाजी में भारत का पहला पैरालंपिक स्वर्ण पदक है। पैरालंपिक में ये हरविंदर सिंह का दूसरा मेडल है। इससे पहले उन्होंने 2020 पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक में भारत का आर्चरी में ये पहला मेडल भी है। अब तक पैरालंपिक में भारत ने आर्चरी के अलावा शूटिंग, एथलेटिक्स और बैडमिंटन में गोल्ड मेडल जीता है। हरविंदर सिंह का गोल्ड मेडल मैच में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें पहले सेट को उन्होंने 28-24 के स्कोर से अपने नाम करने के साथ 2 अहम प्वाइंट हासिल किए। इसके बाद दूसरे सेट में हरविंदर ने फिर से 28 का स्कोर किया, जबकि पौलैंड के पैरा एथलीट 27 का स्कोर ही कर सके। एक अंक के अंतर से यह सेट भी हरविंदर के नाम रहा। फिर तीसरे सेट में हरविंदर ने 29-25 के अंतर से जीत हासिल करने के साथ 2 प्वाइंट बटोरे और 6-0 से मात देते हुए गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की। इससे पहले हरविंदर ने सेमीफाइनल मैच में ईरान के पैरा एथलीट के खिलाफ 1-3 से पिछड़ने के बाद शानदार तरीके से वापसी करने के साथ 7-3 से जीत हासिल की और गोल्ड मेडल मैच के लिए अपनी जगह को पक्का किया था।

हरविंदर ने कहा, "यह शानदार है, क्योंकि यह 12 साल पहले का सपना था जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी। मैंने बस अपनी भावनाओं, शरीर को नियंत्रित किया, अपनी शूटिंग को नियंत्रित किया और उसी का परिणाम यह स्वर्ण पदक है।"

इसके साथ अब पेरिस पैरालंपिक में भारत के 22 पदक हो गए हैं। इनमें चार स्वर्ण, आठ रजत और 10 कांस्य हैं। अब भारत पैरालंपिक की पदक तालिका में 15 वें स्थान पर पहुंच गया है।

हरविंदर सिंह कौन हैं?

25 फरवरी 1991 को कैथल, हरियाणा में जन्मे हरविंदर सिंह एक भारतीय पैरा तीरंदाज हैं, जिन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 2018 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक सहित कई पदक जीते हैं।

इस प्रसिद्ध पैरा तीरंदाज के पैरों में विकलांगता है, जो एक चिकित्सा दुर्घटना के कारण उत्पन्न हुई थी, जब वह सिर्फ डेढ़ साल का था।

डेंगू बुखार होने के बाद, उन्हें एक स्थानीय डॉक्टर ने एक इंजेक्शन लगाया, जिससे उनकी गतिशीलता पर गंभीर असर पड़ा और वे अपने पैरों को ठीक से हिलाने में असमर्थ हो गए।

इस चुनौती के बावजूद, सिंह ने तीरंदाजी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, एक प्रमुख पैरा-एथलीट बन गए और कई पदक जीते, जिसमें टोक्यो 2020 खेलों में तीरंदाजी में भारत का पहला पैरालंपिक पदक भी शामिल है।

हरविंदर सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2012 में  लंदन पैरालिंपिक से प्रेरित होकर किया था | 2010 में पंजाबी यूनिवर्सिटी में तीरंदाजों को प्रशिक्षण देते हुए देखने के दौरान उनकी पहली मुलाकात इस खेल से हुई।

लंदन ओलंपिक के दौरान देखे गए प्रदर्शनों से प्रेरित होकर, वह अगले ही दिन तीरंदाजी रेंज में शामिल हो गए।

सिंह ने 2017 पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया, जिसमें वे सातवें स्थान पर रहे। उनकी लगन का फल उन्हें 2018 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर मिला, जो उनके उभरते करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।


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