रहीम ने यह प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया | और शाम का भोजन तय हो गया |
“राजा के यहां भोजन करने जा रहा हूँ |”
“पर मैं तो वचन दे चूका हूँ कि भोजन करूंगा |”
अमी पियावत मानबिनु, कह रहीम न सुहाय |
प्रेम सहित मरिवौ भलौ, जो विष देय बुलाया ||
राजा ने पृथ्वी पर सिर रखकर कहा- “मुझे प्राणों की भीख न देकर, केवल उसी बात को बता देने की भीख दें |”
रहीम बोले- “अच्छी बात है, लीजिये सुन लीजिए | मेरे और आपके प्रभु श्रीकृष्ण ने मुझे यह बात बताई थी |”
