जयंती विशेष:- अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से एक थे पंडित रविशंकर शुक्ल Date : 02-Aug-2024 राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से एक हैं पंडित रविशंकर शुक्ला जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया | कौन थे पंडित रविशंकर शुक्ला 2 अगस्त 1877 को जन्मे रविशंकर शुक्ल का जन्म सागर जिले में हुआ था, उनके पिता का नाम जगन्नाथ शुक्ला था. रविशंकर शुक्ला ने अपनी प्राथमिक शिक्षा सागर में ही पूरी की. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की इस दौरान उनके शिक्षा दीक्षा रायपुर जबलपुर और नागपुर से संपन्न हुई.शि क्षा समाप्त करने के बाद 3 साल तक खैरागढ़ राज्य के हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक और बस्तर कवर्धा एवं खैरागढ़ के राजकुमारों के शिक्षक रहे | राजनीतिक सफर शुरू से पण्डित रविशंकर शुक्ल सार्वजनिक कार्यों पर रूचि रखते थे.लेकिन देश को आजाद कराने में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए असहयोग आंदोलन शुरू होने के दौरान ही उन्होंने वकालत छोड़ कर आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया. साथी राजनीति के क्षेत्र में भी उतर आए. आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. साल 1930 में पंडित रविशंकर शुक्ल को 3 साल की सजा हुई. पंडित रविशंकर शुक्ला एक कानूनी विद्वान के साथ-साथ एक उत्कृष्ट अनुभवी नेता थे . वह एक प्रतिबंध लोकतांत्रिक और देशभक्त थे. जिन्होंने राष्ट्र की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. मुख्यमंत्री का पद पंडित रविशंकर शुक्ल ने 1906 से रायपुर में वकालत प्रारंभ की। वे स्वतंत्रता आन्दोलनों में भी भाग लेते रहे। : पंडित रविशंकर शुक्ला स्वराज पार्टी की ओर से राज्यसभा के सदस्य चुने गए. सन 1926 से 1937 तक वह रायपुर जिला बोर्ड के सदस्य रहे.1923 में नागपुर में आयोजित झंडा सत्याग्रह में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व 4 जुलाई, 1937 ई. को खरे के प्रथम कांग्रेसी मंत्री मंडल में शिक्षा मंत्रि के रूप में सम्मिलित हुए तथा विद्या मंदिर योजनाओं को क्रियान्वित किया. 15 अगस्त, 1947 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 1956 तक वे इस पद पर बने रहे | 1956 में मध्य प्रदेश के सीएम बने पंडित रविशंकर शुक्ल 31 अक्टूबर 1956 तक मध्य भारत के मुख्यमंत्री थे। इस बीच राज्य पुनर्गठन आयोग भी कार्य कर रहा था और 1 नवंबर 1956 को नया राज्य अस्तित्व में आया और नाम रखा गया मध्य प्रदेश। उस समय छत्तीसगढ़ भी मध्य प्रदेश का भाग हुआ करता था। पंडित रविशंकर शुक्ल को मध्य प्रदेश का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया और इस तरह उन्होंने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन चुनाव नहीं लड़ा। पण्डित रविशंकर शुक्ल जी का निधन 31 दिसम्बर, 1956 को दिल्ली में हुआ। शुक्ल जी की स्मृति में विधान सभा सचिवालय द्वारा वर्ष 1995-1996 से उत्कृष्ट मंत्री पुरस्कार स्थापित किया गया है। इस तरह पंडित रविशंकर शुक्ल दो बार मध्य भारत और एक बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने चुनाव सिर्फ एक बार ही लड़ा। शुक्ल कुल छह साल 340 दिनों तक मुख्यमंत्री रहे।