शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था |इसलिए इसे धनतेरस कहा जाता है | इस दिन माँ लक्ष्मी,कुबेर गणेश जी की पूजा की जाती है | मान्यता है कि ऐसा करने से देवता प्रसन्न होते है |
दिवाली हिन्दू धर्म की प्रमुख त्योहारों में से एक है| इस दिन घर के आस पास की जगहों को दीपों से रोशन किया जाता है | पांच दिन का यह पर्व धूम धाम से मनाया जाता है | हिन्दू धर्म में इन सभी धर्मो का विशेष महत्व होता है |
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक भगवान विष्णु को पृथ्वी लोक का भ्रमण करने की इछा हुई ,तब माता लक्ष्मी ने भी उनके साथ जाना कि इच्छा जताई तब भगवान विष्णु कहा कि अगर आप मेरी बात मानोगी तब मेरे साथ जाओगी | लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु की बातो को स्वीकार किया और दोनों पृथ्वी लोक में प्रवेश किये और घुमने लगे |कुछ समय पश्चात विष्णु जी ने माता लक्ष्मी जी से कहते है “मै दक्षिण की ओर रहा हूँ तुम मेरी यही प्रतीक्षा करना और उस दिशा में तुम मत आना यह कहकर विष्णु जी दक्षिण की ओर की ओर प्रस्थान किये |
भगवान विष्णु के जाने के पश्चात माता लक्ष्मी को कुछ संदेह हुआ और मन ही मन सोचने लगे की दक्षिण दिशा की और ऐसा क्या है जो मुझे जाने से मन किया गया ? माता लक्ष्मी से रहा नहीं गया और वह विष्णु जी से पीछे-पीछे चली गई | माता लक्ष्मी कुछ दूर पहुंची तो उनको सरसों की एक खेत दिखाई देती जो अत्यंत मनमोहक दिख रहे थे जिससे माता मोहित हो जाती है और उस सरसों के फूलों से श्रृगार करती है और आगे चलती है तो उन्हें गन्ने के खेती दिखाई दिया माता लक्ष्मी ने गाने को तोड़कर चूसने लग जाती है |
कुछ समय पश्चात वह भगवान विष्णु पहुच जाते है और क्रोधित होते है और कहते है कि “ मैंने तुमको इधर आने से मन किया था,पर तुम मेरी बात को नहीं मणि और यह किसान की चोरी का अपराधी बन बैठी | मै तुमको श्राप देता हूँ- अब तुम इस अपराध की रूप में किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो ऐसा कहकर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को पृथ्वी लोक पर छोड़ कर बैकुंठ की ओर चले जाते है|
भगवान विष्णु के आदेश के अनुसार माता लक्ष्मी उस किसान से घर में रहने लगती है | माता के वास करने से उस किसान के घर में धन,रत्न ,स्वर्ण,अन्न आदि सभी चीजों से भर जाता है | वही 12 वर्षो तक किसान का जीवन बड़े आनंद से कट रहे थे |
12वर्ष बाद विष्णु जी माता लक्ष्मी को लेने आये तब माँ लक्ष्मी ने किसान और उसकी पत्नी को साक्षात् रूप में दर्शन दिए और कहा की मेरे जाने का समय हो गया है मुझे श्राप मिला था इस लिए मै तुम्हारी सेवा 12 वर्ष तक कर रही थी |तुम्हारी सेवा पूरी हो चुकी है | यह बात सुन कर किसान सोचने लगा की माँ लक्ष्मी चली गई तो मैं फिर से गरीब हो जाऊंगा इस लिए वह माँ लक्ष्मी को भेजने से इंकार कर दिया| तब माँ लक्ष्मी ने कहा कि तुम मुझे रोकना चाहते तो मैं जैसे कहती हूँ वैसे करना , कल धनतेरस है तुम कल अपने घर को लिपाई व स्वच्छ करना | रात में घी का दीपक जला कर रखना और सायंकाल मेरी पूजान करना तथा तांबे के कलश में एक रूपया भरकर मेरे लिए रखना| मैं उस कलश में निवास करुँगी इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर में तुम्हारे घर में वास करुँगी | माता लक्ष्मी के कहे अनुसार किसान ने विधि पूर्वक माँ लक्ष्मी की आराधना किया और उसका घर धन धान्य से परिपूर्ण हो गया | मान्यता के अनुसार धनतेरस की दिन माता लक्ष्मी की विधि पूर्वक करने से घर में धन की कमी नहीं होती है | और माँ लक्ष्मी की कृपा सदा से लिए बनी रहती है |
