झलकारी के पिता के पास कई गायें और कई भैसें थीं माता के देहांत हो जाने के कारण इनकी देख-रेख झलकारी ही करती थी | गायों में एक गाय उसे बहुत प्रिय थी | अपने हिस्से की रोटी भी वह उसे खिला देती थी | उसके भोजन और उसकी सफाई का का वह बहुत ध्यान रखती थी | कभी-कभी अकेले ही उसे उसके भोजन और उसकी सफाई का वह बहुत ध्यान रखती थी | कभी-कभी अकेले ही उसे जंगल में लेकर निकल जाती, जब तक उसका पेट नहीं भरता उसे चरती रहती | इतने पशुओं में उसे गाय ही क्यों पसंद थी, प्रश्न करने पर वह निरुत्तर हो जाती |
पुरे गाँव में झलकारी और उसकी गाय की चर्चा रहती थी | देखने में भी बालिका झलकारी हष्ट-पुष्ट और सुन्दर थी | जो भी उस बालिका को देखता, वह उसकी आंखों में छा जाती | उसकी गाय और झलकारी दोनों सुन्दर होने के कारण गांववालों की आंखों की दो तारिकाएं थीं | जहां झलकारी, वहां उसकी गाय, और जहां उसकी गाय, वहां झलकारी | एक बुजुर्ग तो झलकारी को देखते ही कहते थे- ''जब ब्याहली जाएगी तो इसे भी ससुराल ले जाइयो |'' झलकारी शर्मा जाती |
गाय को भी गांव में यदि किसी से प्रेम था तो झलकारी से | चारा खायेगी तो झलकारी के हाथ से, पानी पिएगी तो झलकारी के साथ से | एक दिन चारा देने के बाद झलकारी बारात देखने चली गई | अपनी सखियों के साथ बारात देखती रही | झलकारी के पिता सदोवा सिंह ने जब अपने अन्य जानवरों को पानी रखा तो इस गाय के आगे भी रख दिया | वह चारा खाने के बाद रम्भाती रही, परन्तु उसने पानी नहीं पिया | झलकारी लगभग दो घंटे बाद लौटी | तब तक गाय का रम्भाना बंद नहीं हुआ | झलकारी उसके रम्भाने का अर्थ समझती थी | वह आकर गाय की गर्दन में झूलकर उसे प्यार करने लगी | उसने उसके चारे से सना मुँह साफ किया | गाय झलकारी का हाथ चाटने लगी | झलकारी उसकी यह भाषा नहीं समझी | गाय ने अपना दाहिना पैर बढ़ा कर पानी की बाल्टी गिरा दी | अब झलकारी को याद आया कि वह उसे चारा तो दे गई थी, पर पानी देना भूल गई थी | झलकारी बाल्टी को उठाकर ले गई, अपने हाथ से पानी लाई | गाय के गले पर प्यार से हाथ फेरा | तब कहीं जाकर गाय ने पानी पीया | झलकारी को महसूस होने लगा था कि प्यार की भाषा पशु भी समझते हैं |
झलकारी का पशु-प्रेम पूरे गांव में प्रसिद्ध हो गया | उसके प्रेम को देखकर गांव वाले अपने पशुओं को भी उसी सौहार्द से से रखने की सलाह एक-दूसरे को देते | इस सौहार्द से न केवल पशुओं के प्रति प्रेम बढ़ा, बल्कि आपसी घृणा भी कमहोने लगी | गांववालों के ह्रदय में दबा प्रेम उभरने लगा | झलकारी और उसकी गाय का प्रेम गांव-गांव तक एक उदाहरण बन गया |
वर्षा ऋतु समाप्त हो चुकी थी | पूरा जंगल हरियाली से भरपूर था | हरे रंग को देखकर पशुओं में अपेक्षा जाग उठती है | इन दिनों झलकारी अपनी गाय को जंगल अवश्य ले जाती थी | झलकारी अपनी सखियों के साथ पेड़ के नीचे खेलती रहती और उनकी गायें आस-पास ही चरती रहतीं | शाम को वे अपने-अपने पशुओं के साथ घर लौट आतीं | आज न जाने क्या हुआ | झलकारी की गाय ने कुछ नहीं खाया | उसकी आंखों में डर था | वह मुँह उठाकर कभी इधर भागती, कभी उधर भागती | आज वह झलकारी के कहने पर भी नहीं आई | गांव के अन्य पशुओं के चले जाने के बाद वह ऐसा करने लगी | झलकारी लाठी लिए पीछे-पीछे थी, वह भी उसके पीछे दौड़ने लगी | उसे लगा किसी ने उसकी प्यारी गाय को कुछ खिला दिया है | वह पागल हो गई है |
गाय झलकारी से लगभग बीस गज दूर थी | ये बीस गज छोटे-छोटे पौधे और हरी-भरी झाड़ियों से भरे थे| झलकारी को केवल गाय का सर दिखाई दे रहा था | वह रास्ता ढूंढ़कर उसकी ओर बढ़ रही थी | अचानक उसने गाय की दुखभरी रम्भाने की आवाज सुनी | अवश्य उस पर कोई विपत्ति आई है | वह झलकारी को पुकार रही थी | झलकारी तेजी से झाड़ियों को लांघती हुई उस स्थल पर पहुंची जहां से दुखभरी आवाज आई थी | वह यह देखकर स्तब्ध रह गई | उसकी प्यारी गाय को को चीते ने दबोच रखा था | गाय की गर्दन चीते के मुँह में थी | उसकी आंखें खुली थीं | वह बार-बार अपना पूंछ पटक रही थी | झलकारी की आंखें आंसू से डबडबा गईं | एक क्षण के तुरंत बाद उसके दांत भिंच गए | उसकी आंखें लाल हो गईं | उसकी मुट्ठियों में लाठी कस गई | उसकी जो चीख निकली, उसमें आक्रमण की ध्वनि थी | चीख के साथ ही उसकी लाठी पुरे वेग के साथ उठी और चीते की उन आंखों पर पड़ी जो झलकारी को निहार रही थीं | लाठी इतनी जोर से पड़ी कि चीते की एक आंख फूटी और उसकी नाक की हड्डी टूट गई | कुछ क्षण के लिए चिता बेहोश हो गया| बस से कुछ क्षण ही झलकारी के काम आए | इन क्षणों में पचासों लाठी एक के बाद एक चीते के मुंह पर झलकारी ने दे मारी | जब झलकारी थक कर चूर हो गई, तो लाठियां रुकीं और झलकारी निढाल होकर अपनी गाय पर गिर पड़ी |
झलकारी की गाय की बात उनकी सहेलियों से सुनकर झलकारी के पिता गांव वालों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे | उन्होंने देखा कि झलकारी गाय के ऊपर बेहोश पड़ी है | चीता मरा पड़ा है | और झलकारी की गाय अंतिम सासें ले रही है |
