शिक्षाप्रद कहानी: झलकारी का पशु-प्रेम | The Voice TV

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शिक्षाप्रद कहानी: झलकारी का पशु-प्रेम

Date : 04-Nov-2023

 झलकारी के पिता के पास कई गायें और कई भैसें थीं माता के देहांत हो जाने के कारण इनकी देख-रेख  झलकारी ही करती थी | गायों में एक गाय उसे बहुत प्रिय थी | अपने हिस्से की रोटी भी वह उसे खिला देती थी | उसके भोजन और उसकी सफाई का का वह  बहुत ध्यान  रखती थी | कभी-कभी अकेले  ही उसे उसके भोजन और उसकी सफाई का वह  बहुत ध्यान  रखती थी | कभी-कभी अकेले  ही उसे जंगल में लेकर निकल जाती, जब तक उसका पेट नहीं भरता  उसे चरती रहती | इतने पशुओं  में उसे गाय  ही क्यों पसंद थी, प्रश्न करने पर वह  निरुत्तर  हो जाती |

पुरे गाँव  में झलकारी और उसकी गाय  की चर्चा  रहती थी | देखने में भी बालिका  झलकारी  हष्ट-पुष्ट  और सुन्दर  थी | जो भी उस बालिका को देखता, वह  उसकी आंखों  में छा  जाती | उसकी गाय  और झलकारी दोनों सुन्दर  होने के कारण  गांववालों  की आंखों की दो तारिकाएं  थीं | जहां झलकारी, वहां उसकी गाय, और जहां उसकी गाय, वहां  झलकारी | एक बुजुर्ग तो झलकारी को देखते ही कहते थे- ''जब ब्याहली  जाएगी तो इसे भी ससुराल  ले जाइयो |'' झलकारी  शर्मा जाती |

गाय को भी गांव में यदि किसी से प्रेम था तो झलकारी से | चारा  खायेगी तो झलकारी के हाथ से, पानी पिएगी तो झलकारी के साथ से | एक दिन चारा देने के बाद झलकारी बारात देखने चली गई | अपनी सखियों के साथ बारात देखती रही |  झलकारी के पिता  सदोवा सिंह ने जब अपने अन्य जानवरों को पानी रखा  तो इस गाय के आगे भी रख  दिया | वह  चारा खाने के बाद रम्भाती रही, परन्तु  उसने पानी नहीं पिया | झलकारी लगभग दो घंटे  बाद लौटी | तब  तक गाय का रम्भाना  बंद नहीं हुआ | झलकारी उसके रम्भाने  का अर्थ  समझती थी | वह  आकर  गाय की गर्दन  में झूलकर उसे प्यार करने लगी | उसने उसके चारे से सना  मुँह साफ किया | गाय झलकारी का हाथ चाटने लगी | झलकारी उसकी यह भाषा  नहीं समझी | गाय ने अपना दाहिना  पैर बढ़ा कर पानी की बाल्टी गिरा  दी | अब झलकारी को याद आया कि  वह  उसे चारा तो दे गई थी, पर पानी देना भूल गई थी | झलकारी बाल्टी को उठाकर ले गई, अपने हाथ से पानी लाई  | गाय  के गले पर प्यार से हाथ फेरा | तब कहीं  जाकर गाय ने पानी पीया | झलकारी को महसूस होने लगा था कि  प्यार की भाषा पशु भी समझते हैं |

झलकारी का पशु-प्रेम पूरे गांव में प्रसिद्ध  हो गया | उसके प्रेम को देखकर गांव  वाले अपने पशुओं  को भी उसी सौहार्द से से रखने की सलाह एक-दूसरे को देते | इस सौहार्द से केवल पशुओं के प्रति  प्रेम बढ़ा, बल्कि  आपसी घृणा  भी कमहोने लगी | गांववालों के ह्रदय में दबा प्रेम उभरने लगा | झलकारी और उसकी गाय का प्रेम गांव-गांव  तक एक उदाहरण बन गया |

वर्षा ऋतु समाप्त हो चुकी  थी | पूरा जंगल हरियाली  से भरपूर था | हरे रंग को देखकर पशुओं में अपेक्षा जाग उठती है | इन दिनों झलकारी अपनी गाय को जंगल अवश्य ले जाती थी | झलकारी अपनी सखियों  के साथ पेड़ के नीचे  खेलती रहती और उनकी गायें  आस-पास ही चरती  रहतीं | शाम को वे अपने-अपने पशुओं के साथ घर लौट आतीं | आज जाने क्या हुआ | झलकारी की गाय ने कुछ नहीं खाया | उसकी आंखों में डर था | वह  मुँह  उठाकर कभी इधर भागती, कभी उधर भागती | आज वह झलकारी के कहने पर भी नहीं आई | गांव के अन्य पशुओं के चले जाने के बाद वह ऐसा करने लगी | झलकारी  लाठी  लिए पीछे-पीछे थी, वह भी उसके पीछे दौड़ने लगी | उसे लगा किसी ने उसकी प्यारी गाय को कुछ खिला दिया है | वह पागल हो गई है |

गाय झलकारी से लगभग बीस गज दूर थी | ये बीस गज छोटे-छोटे पौधे और हरी-भरी झाड़ियों से भरे थे| झलकारी को केवल गाय का सर दिखाई दे रहा था | वह रास्ता ढूंढ़कर उसकी ओर बढ़ रही थी | अचानक उसने गाय की दुखभरी  रम्भाने की आवाज सुनी | अवश्य उस पर कोई विपत्ति आई है | वह झलकारी को पुकार रही थी | झलकारी तेजी से झाड़ियों को लांघती हुई उस स्थल पर पहुंची जहां  से दुखभरी आवाज आई थी | वह यह देखकर स्तब्ध  रह गई | उसकी प्यारी गाय को को चीते ने दबोच रखा था | गाय की गर्दन चीते के मुँह में थी | उसकी आंखें  खुली थीं | वह बार-बार अपना पूंछ  पटक रही थी | झलकारी की आंखें  आंसू से डबडबा गईं | एक क्षण के तुरंत बाद उसके दांत भिंच गए | उसकी आंखें  लाल हो गईं  | उसकी मुट्ठियों में लाठी कस गई | उसकी जो चीख निकली, उसमें आक्रमण की ध्वनि थी | चीख के साथ ही उसकी लाठी पुरे वेग के साथ उठी और चीते की उन आंखों  पर पड़ी जो झलकारी को निहार रही थीं | लाठी  इतनी जोर से पड़ी कि  चीते की एक आंख फूटी और उसकी नाक की हड्डी टूट गई | कुछ क्षण के लिए चिता बेहोश हो गया| बस से कुछ क्षण ही झलकारी के काम आए | इन क्षणों में पचासों लाठी एक के बाद एक चीते के मुंह  पर झलकारी ने दे मारी | जब झलकारी थक कर चूर  हो गई, तो लाठियां रुकीं  और झलकारी निढाल होकर अपनी गाय पर गिर पड़ी |

झलकारी की गाय की बात उनकी सहेलियों  से सुनकर झलकारी के पिता गांव वालों के साथ घटनास्थल पर  पहुंचे | उन्होंने देखा कि झलकारी गाय के ऊपर बेहोश पड़ी है | चीता मरा पड़ा है | और झलकारी की गाय अंतिम सासें ले रही है |

 


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