रूस ने INF संधि से हटने की घोषणा की, मिसाइल प्रतिबंधों को समाप्त किया
रूस ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि वह अब 1987 की इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज़ (INF) संधि के प्रति प्रतिबद्ध नहीं रहेगा। इस ऐतिहासिक हथियार नियंत्रण समझौते के तहत 500 से 5,500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली ज़मीनी-आधारित मिसाइलों पर प्रतिबंध लगाया गया था।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि INF संधि की शर्तें अब अमान्य हैं और रूस अब मिसाइल तैनाती पर किसी भी प्रतिबंध का पालन नहीं करेगा। मास्को ने यह कदम पश्चिमी देशों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोपों के बीच उठाया है।
रूस ने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को इस निर्णय का मुख्य कारण बताया है — जिनमें फिलीपींस में टाइफॉन मिसाइल प्रणाली की तैनाती और ऑस्ट्रेलिया में हुए तालिस्मन सेबर सैन्य अभ्यास के दौरान मिसाइल परीक्षण शामिल हैं। मॉस्को का कहना है कि ये गतिविधियाँ वैश्विक सामरिक स्थिरता को कमजोर करती हैं और रूस की सुरक्षा पर प्रत्यक्ष दबाव बनाती हैं।
गौरतलब है कि 2019 में अमेरिका ने रूस पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए INF संधि से पारस्परिक रूप से हटने की प्रक्रिया शुरू की थी। रूस ने इन आरोपों को नकारते हुए दावा किया था कि अमेरिका स्वयं प्रतिबंधित मिसाइल प्रणालियाँ विकसित कर रहा है, जिससे संधि का मूल उद्देश्य ही कमजोर हो गया।
रूस का यह ताज़ा कदम मॉस्को और वाशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। हाल ही में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने दो परमाणु पनडुब्बियाँ अज्ञात क्षेत्रों में तैनात की हैं। यह बयान पूर्व रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की एक विवादास्पद टिप्पणी के जवाब में आया था, जिसे ट्रंप ने भड़काऊ करार दिया।
INF संधि से रूस की पूर्ण वापसी को वैश्विक परमाणु संतुलन और सामरिक स्थिरता के लिए एक चिंताजनक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा वातावरण को और अधिक जटिल बना सकता है।
