नई दिल्ली/वाराणसी, 12 जून । भारत को जी20 की अध्यक्षता के दौरान बड़ी सफलता हासिल हुई, जब वाराणसी में आयोजित संगठन से जुड़ी विकास मंत्रियों की बैठक में ग्लोबल साउथ (विकासशील देश) की समस्याओं और विकास का मुद्दा विचार-विमर्श और सहमति का केन्द्र बिन्दु बन गया।
विकास मंत्रियों के तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन सदस्य देशों ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की ओर तेजी से बढ़ने के लिए एक कार्ययोजना को स्वीकार किया। इसके साथ ही सतत विकास के लिए अनुकूल जीवनशैली अपनाने संबंधी 20 प्रमुख सिद्धांत भी अंगीकार किए गए । ये दोनों दस्तावेज सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए। इन्हें नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को आयोजित जी20 शिखरवार्ता में नेताओं के सामने विचार के लिए रखा जाएगा।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बैठक में हुए विचार-विमर्श की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि जी20 विकास मंत्रियों की बैठक के अध्यक्ष के रूप में भारत की ओर से निष्कर्ष और सारांश पत्र जारी किया गया। संयुक्त घोषणापत्र के स्थान पर अध्यक्षीय सारांश पत्र जारी करने का कारण यह था कि कुछ बिन्दुओं पर सहमति नहीं बन पायी। इसमें यूक्रेन संघर्ष संबंधी मुद्दों पर सदस्य देशों की एक राय नहीं थी। सारांश पत्र के पैराग्राफ 10 और 11 में यूक्रेन युद्ध और इसमें रूस की भूमिका का उल्लेख था। इस पर संभवतया रूस और चीन ने आपत्ति व्यक्त की थी।
उल्लेखनीय है कि जी20 वित्त मंत्रियों और विदेश मंत्रियों की पिछली बैठकों के बाद भी भारत ने अध्यक्ष के तौर पर सारांश पत्र ही जारी किया था। यूक्रेन युद्ध के बारे में रूस और चीन ने उस समय भी आपत्ति व्यक्त की थी।
जयशंकर ने कहा कि विकास मंत्रियों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन को बहुत सराहा गया। प्रधानमंत्री के मानव केन्द्रित गरीबोन्मुखी और समावेशी विकास के विजन को दुनिया के लिए प्रेरणादायक माना गया। विदेश मंत्री ने कहा कि मेजबान देश के रूप में भारत को यह संतोष है कि ग्लोबल साउथ देशों की खाद्य उर्वरक और ऊर्जा आवश्यकता जैसी समस्या विचार विमर्श के केन्द्र में लौट आयी हैं। उन्होंने यूक्रेन संघर्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसके जारी रहने के बावजूद ग्लोबल साउथ की समस्याओं और विकास एजेंडे को दर किनार नहीं किया जा सकता। बैठक में सदस्य देशों ने यह महसूस किया कि भारत ने जी7 अध्यक्षता काल में पहली बार ग्लोबल साउथ की आवाज को पुरजोर तरीके से बुलंद किया है। विकसित देशों के संगठन जी7 की ओर से रूस के हीरा निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण भारत के संबंधित उद्योग पर पड़ रहे दुष्प्रभाव के संबंध में भारत ने अपनी चिंता व्यक्त की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिरोशिमा में जी 7 शिखरवार्ता के दौरान सदस्य देशों के नेताओं को भारत की चिंताओं से अवगत कराया था। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपनी यूरोप यात्रा के दौरान बेल्जियम और यूरोपीय संघ के के नेताओं से बात की थी। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि लोगों की आजीविका से जुड़े मसलों पर फैसले मनमाने तरीके से नहीं किए जाने चाहिए।
जी7 की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के कारण गुजरात में हीरा तराशने के उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रूस से हीरों का आयात कर उन्हे सूरत में तराशने और पॉलिश करने का काम किया जाता है।
