भुवनेश्वर, 25 अप्रैल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टिपूर्ण नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार पर देश के युवा वर्ग के भविष्य को तैयार करने के लिए शिक्षा व कौशल विकास के पारिस्थितिकी के ट्रांसफार्मेशन को लेकर भारत व सिंगापुर के बीच चर्चा हुई। दोनों देश आगामी दिनों में शिक्षा के साथ साथ कौशल विकास को लेकर मिल कर काम करेंगे। मंगलवार को जी 20 की शिक्षा संबंधित वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक के परिप्रेक्ष्य में भारत व सिंगापुर के बीच आयोजित कार्यशाला में शामिल होकर केन्द्रीय शिक्षा, कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने यह बात कही ।
फ्य़ूचर आफ वर्क, भारत एवं सिंगापुर के स्किल आर्किटेक्चर व गवर्नेंस मॉडल की थीम पर आयोजित कार्यशाला में शामिल होकर प्रधान ने कहा कि भारत व सिंगापुर के बीच रणनीतिक भागीदारी में कौशल विकास व ज्ञान एक प्रमुख हिस्सा है। दोनों देशों के पास इन मामलों में संयुक्त रूप से काम करने के काफी अवसर हैं । विशेष रूप से भविष्य में वर्क फोर्स तैयार करने की दिशा में दोनों देश मिल कर काम करेंगे और दोनों देशों काे लक्ष्य हासिल हो सकेगा ।
उन्होंने बताया कि फ्यूचर आफ वर्क पर भारत व सिंगापुर के बीच तीन मुद्दे जैसे कौशल विकास के लिए नये पाठ्यक्रम तैयार करना, वोकेशनल कोर्स व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारिस्थितिकी के निर्माण हेतु फ्रेमवर्क व लगातार स्किलिंग के लिए अप्रेंटिस को लेकर चर्चा की गई। सिंगापुर सरकार के शिक्षा, कौशल विकास विभाग, विदेश विभाग के अधिकारियों के साथ भारत सरकार के शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा विभाग से प्रारंभ कर वोकेशनल शिक्षा व अन्य शिक्षा से जुड़े बोर्डों को कैसे सिंगापुर के माडल को भारत में उपयोग में लाया जा सकेगा, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस कार्यशाला में सिंगापुर के हाई-कमिश्नर सिमन वंग, सिगापुर के उच्च शिक्षा, कौशल विकास व शिक्षा विभाग के उप सचिव मेलिसा खु व भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षाविद तथा छात्र छात्राओं ने भाग लिया ।
