कोलकाता, 29 मार्च । पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार की जांच के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों गिरफ्तार एनवाईएसए कम्पनी के तत्कालीन उपनिदेशक नीलाद्रि दास से पूछताछ में और कई राज खुल रहे हैं।
पता चला है कि वह दो कंपनियों का मालिक है। उत्तर पुस्तिका तैयार करने और उसकी जांच के लिए उक्त कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी और इसी के उप निदेशक के तौर पर नीलाद्रि ने सरकार के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं से लेकर नौकरशाहों तक से गहरी सांठगांठ की थी।
सीबीआई सूत्रों ने बताया है कि भ्रष्टाचार की साजिश रचने में नीलाद्रि की भूमिका बहुत बड़ी थी। योजनाबद्ध तरीके से शिक्षक नियुक्ति के लिए रिक्त पद सृजित करने, उसका ओएमआर शीट तैयार करने की जिम्मेदारी अपनी कंपनी को दिलाने और वहीं से ऐसे उम्मीदवारों से रुपये की वसूली करने की योजना बनाई गई जिन्होंने शिक्षक नियुक्ति के लिए परीक्षा दी। नीलाद्रि की इसमें मुख्य भूमिका थी। उसने सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं से लेकर राज्य प्रशासन के बड़े नौकरशाहों तक से मिलजुल कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है। न केवल शिक्षक नियुक्ति में बल्कि राज्य पुलिस, नगरपालिका, फूड इंस्पेक्टर समेत अन्य सरकारी विभागों की नियुक्ति में उसकी भूमिका संदिग्ध रही है।
सीबीआई सूत्रों ने कहा कि नीलाद्रि के स्वामित्व वाली दो कंपनियों में से एक रियल एस्टेट कंपनी है और दूसरी सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) से जुड़ी है। इन दोनों का नई दिल्ली में पंजीकृत कार्यालय है।
यह पता चला है कि रियल एस्टेट गतिविधियों में शामिल कॉरपोरेट इकाई का नाम एनडी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड है, जिसका पंजीकृत कार्यालय टी-08-06-02, कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज, लक्ष्मी नगर, अक्षरधाम मंदिर के पास है। दूसरी इकाई एनडी इन्फो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड है, जिसका वही पंजीकृत पता है। नीलाद्रि दास दोनों कंपनियों में दो निदेशकों में से एक हैं, जबकि दूसरे निदेशक नादिन दास हैं।
सीबीआई के अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि घोटाले की आय में नीलाद्रि दास का हिस्सा इन कॉर्पोरेट संस्थाओं के माध्यम से भेजा गया था या नहीं।
यह पहली बार नहीं है जब नीलाद्रि दास को गिरफ्तार किया गया है। मार्च 2019 में पूर्वी मिदनापुर जिले में उसके खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी के बाद जालसाजी के एक मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार किया था।
हालांकि, उनका नाम बहुत तेजी से जांच प्रक्रिया से हटा दिया गया और सीआईडी ने इस मामले में चार्जशीट में उनका नाम तक नहीं दिया। इसीलिए यह और भी संदिग्ध है और सीबीआई इस संबंध में सीआईडी से रिपोर्ट लेने की तैयारी में है।
सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि इस जालसाजी मामले में नीलाद्रि दास की गिरफ्तारी के कुछ दिनों के भीतर उस समय सीआईडी ने किस आधार पर नीलाद्रि दास को क्लीन चिट दी थी।
नीलाद्रि के ठिकाने से 8163 ओएमआर शीट बरामद हुए हैं, जिनसे छेड़छाड़ की गई थी और कम नंबर पाने के बावजूद ओएमआर शीट वाले इन उम्मीदवारों का नंबर बढ़ाया गया था।
