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न्यू मीडिया की विश्वसनीयता परखने के लिए उचित मापदंड भी जरूरी

Date : 16-Mar-2023

 साहित्य अकादमी के मीडिया, न्यू मीडिया व साहित्य विषयक परिचर्चा में वक्ताओं के विचार

नई दिल्ली। साहित्य अकादमी के छह दिवसीय साहित्योत्सव के पांचवें दिन बुधवार को मीडिया, न्यू मीडिया और साहित्य विषयक परिचर्चा हुई। इसमें सभी वक्ताओं का मानना था कि न्यू मीडिया से संपर्क और संचार के नए रास्ते खुले हैं, लेकिन उसमें विषय की विश्वनीयता को परखने के लिए कोई उचित मापदंड न होने के कारण अर्थ का अनर्थ होने की संभावना भी बनी रहती है। न्यू मीडिया की विश्वसनीयता परखने के लिए उचित मापदंड होना जरूरी है।

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार सईद अंसारी, अंकुर डेका, प्रभात रंजन और बालेंदु शर्मा दाधीच ने अपने विचार व्यक्त किए। मीडिया, न्यू मीडिया और साहित्य विषयक परिचर्चा में उद्घाटन वक्तव्य प्रख्यात पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक को देना था, लेकिन एक दिन पहले मंगलवार को हुए उनके आकस्मिक निधन के कारण कार्यक्रम का स्वरूप परिवर्तित करना पड़ा। उपस्थित वक्ताओं ने एक मिनट का मौन रखकर डॉ. वैदिक को श्रद्धांजलि अर्पित की।

द्वितीय सत्र मुकेश भारद्वाज की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार इरफान, ओंकारेश्वर पांडेय और शेखर जोशी ने अपने विचार प्रकट किए। सभी का मानना था कि न्यू मीडिया से संपर्क और संचार के नए रास्ते खुले हैं, लेकिन उसमें विषय की विश्वनीयता को परखने के लिए कोई उचित मापदंड न होने के कारण अर्थ का अनर्थ होने की संभावना भी बनी रहती है।

साहित्योत्सव के पांचवें दिन मीडिया, न्यू मीडिया और साहित्य विषयक परिचर्चा के अलावा अन्य विषयों पर भी परिचर्चा का आयोजन किया गया। इनमें सिनेमा और साहित्य, भारत में आदिवासी समुदायों के महाकाव्य, डिजिटल दुनिया में प्रकाशन, मीडिया, न्यू मीडिया और साहित्य विषय थे। सिनेमा और साहित्य परिचर्चा के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध तमिल सिने गीतकार एवं लेखक वैरमुत्तु थे। रत्नोत्तमा सेन गुप्ता की अध्यक्षता में हुई परिचर्चा में प्रख्यात पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज, विनोद भारद्वाज, अजित राय और प्रदीप सरदाना शामिल हुए।

अपने अध्यक्षीय भाषण में रत्नोत्तमा सेनगुप्ता ने कहा कि देश में अभी फिल्म लिटरेसी की आवश्यकता है। इसके बेहतर होने पर ही साहित्य और सिनेमा के रिश्तों में उल्लेखनीय सुधार और बदलाव आएगा। डिजिटल दुनिया में प्रकाशन विषयक परिचर्चा का उद्घाटन प्रख्यात प्रकाशक अशोक घोष ने किया और जिसमें रमेश के. मित्तल एवं निर्मलकांति भट्टाचार्जी ने दो सत्रों की अध्यक्षता की।

छह दिवसीय साहित्योत्सव का गुरुवार को समापन होगा। इस दिन बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां जैसे कहानी-कविता, चित्रकला प्रतियोगिताओं के अलावा बाल लेखकों की साहित्यिक यात्रा भी प्रस्तुत की जाएगी।


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