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राज्यसभा में माइक ऑफ नहीं होता, इमरजेंसी में हुआ था: जगदीप धनखड़

Date : 11-Mar-2023

 मेरठ, 11 मार्च (हि.स.)। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हमारे देश में राष्ट्रवाद की कमी कभी नहीं रही। इस मामले में हमारा डीएनए दुनिया में सबसे मजबूत है। कुछ लोगों ने भारत की प्रतिष्ठा को कुंठित करने की ठान ली है। राज्यसभा में आज तक माइक ऑफ नहीं हुआ है। वे देश के बाहर जाकर कहते हैं कि संसद में माइक बंद कर दिया गया जबकि देश के अंदर इमरजेंसी के समय संकट आया था। उस दौरान माइक भी बंद हुआ था। वह दिन अब कभी नहीं आ सकता।

धन सिंह गुर्जर पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वालों पर चुप्पी मत साधिये। जनता को इन मामलों में दखल देना होगा। इससे सभी रास्ते पर आएंगे। भारत के पास पांच हजार वर्षों से अधिक की संस्कृति मौजूद है। हमें देश को आगे रखने का संकल्प लेना चाहिए। उत्तर प्रदेश में रहने वाले भाग्यशाली है। भारत का भविष्य 2047 तक उज्ज्वल रहेगा। भारत विश्वगुरु होगा। भारत दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति होगा।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के अमृत काल की नींव 2014 में पड़ गई थी। 30 साल के बाद पहली बार देश में बहुत की सरकार बनी और उत्तर प्रदेश में भी बड़ा बदलाव आया। पिछले छह वर्ष में जो सोचा नहीं था, वह मुमकिन हो रहा है। इसलिए इस अमृत काल में मुझे 1857 की क्रांति के नायक की प्रतिमा के अनावरण का सौभाग्य मिला है। उनमें बड़ा जज्बा, राष्ट्रभक्ति थी और 800 से ज्यादा बंदियों को छुड़ाया। पूरे देश के अंदर एक नई चिंगारी उत्पन्न हुई। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहते हुए मंगल पांडे द्वारा क्रांति की शुरूआत करने के स्थल पर गया तो यह जानकारी मिली। मेरे अंदर निराशा थी कि हम अपने शहीदों को भूल गए। स्वतंत्रता संग्राम के महायज्ञ में आहुति देने वालों को हम याद क्यों नहीं कर पाए। इतिहास में ये बात सही तरीके से क्यों नहीं समझाई गई। अमृत काल में ऐसे अनसुने और अज्ञात शहीदों और क्रांतिकारियों को याद किया जा रहा है। उनका अनुकरण भी करना है। आज पूरा विश्व भारत का लोहा मान रहा है। किसी भी बड़े संकट के समय दुनिया के देश भारत की ओर देखते हैं। इसका कारण है कि हमने भूले हुए लोगों को याद करना चालू कर दिया है। यह पुलिस प्रशिक्षण केंद्र मील का पत्थर साबित होगा। जो सोचा नहीं था, वह मुमकिन हो रहा है।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को लेकर चिंता होती थी। अब ऐसा बदलाव आया है, उससे मन प्रफुल्लित हो जाता है। सही मायने में विकास की गंगा इसी प्रदेश में बह रही है। पहले उप्र में अराजकता पराकाष्ठा पर थी। कानून व्यवस्था के मामले में उप्र उत्तम प्रदेश है। बिना ऐसी व्यवस्था के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उप्र में जो विकास की नींव अब पड़ रही है, उसका असर देश और विदेश पर पड़ेगा। सितंबर 2022 में एक बहुत बड़ा माइलस्टोन अचीवमेंट हुआ है। ब्रिटेन को पछाड़ कर भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी आर्थिक महाशक्ति बना। इस दशक के अंत तक भारत दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति होगा। आज सभी का मनोबल पराकाष्ठा पर है। दुनिया कौतूहल से हमारी ओर देख रही है।

जगदीप धनखड़ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हमें हमारे शहीदों को ढूंढ़ना होगा। इतिहास ने बहुत बड़ा अन्याय किया है। 1857 कोई गदर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम था। वह हमारे अधिकारों की लड़ाई थी। राजा विजय सिंह गुर्जर की क्रांति का उल्लेख हमारे यहां नहीं मिलता बल्कि एक अंग्रेज इतिहासकार की पुस्तक में मिलता है। अज्ञात क्रांतिकारियों को चिहिन्त करके लोगों को उनके बारे में बताए। 18 साल की जाट वीरांगना शिव देवी तोमर ने 17 अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया। चारों ओर अज्ञात शहीद मिलेगी। वंचित वर्ग से आने वाली मुजफ्फरनगर की महावीरी देवी ने अपनी 22 साथियों के साथ अंग्रेजों को मार गिराया। मेरठ और हरिद्वार के बीच के इलाके में वीरांगना रामप्यारी गुर्जर ने अंग्रेजों को खदेड़ा। पुलिस को लेकर नजरिया भी बदलना चाहिए। पुलिस को डराने वाले लोग आज कानून से डरे हुए हैं। इसी कारण मुख्यमंत्री को नया नाम तक दे दिया गया है।

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि धन सिंह गुर्जर पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में अब तक 24 हजार 811 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मेरठ ने 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया। समाज के सभी वर्गों को इस क्रांति में भाग लेने के लिए मेरठ से ही प्रेरित किया गया। मेरठ में आजादी के आंदोलन की शुरुआत हुई। भारत का इतिहास गौरवशाली रहा है। बच्चों को वीरांगनाओं की वीरता की कहानी सुनाते और पढ़ाते हैं। धन सिंह गुर्जर द्वारा फूंके गए आजादी के बिगुल की आवाज पूरे देश में गूंजी। उनका साहस और देशभक्ति पुलिस के लिए आदर्श है। आजादी के अमृत महोत्सव पर हुए कार्यक्रमों में ऐसे नायकों का गौरव भी लोगों को बताया गया। भारत के पास गर्व करने के लिए अथाह भंडार है।


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