मुंबई, 10 मार्च (हि. स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश उपाध्यक्ष किरीट सोमैया के विरुद्ध शुक्रवार को विधान परिषद में पूर्व मंत्री अनिल परब ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव को विधान परिषद के सभापति ने स्वीकृत कर जांच के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही शुक्रवार को ही बाम्बे हाई कोर्ट ने किरीट सोमैया की न्यायिक जांच का भी निर्देश दिया है। इससे किरीट सोमैया की मुसीबतें बढऩे के आसार दिख रहे हैं।
शुक्रवार को विधान परिषद में अनिल परब ने कहा कि किरीट सोमैया के कहने पर ह्माडा के अधिकारी मिलिंद भूरीकर ने नोटिस भेजा था, जिसे बाद में ह्माडा ने वापस ले लिया था। साथ ही किरीट सोमैया हमेशा उनकी बदनामी करते रहे हैं। इससे उनके विशेष अधिकारों का हनन हुआ है। अनिल परब ने किरीट सोमैया और मिलिंद भूरीकर की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। अनिल परब के इस प्रस्ताव को विधान परिषद के सभापति ने जांच के लिए परिषद की संयुक्त समिति के समक्ष भेज दिया है।
इससे पहले राकांपा नेता और पूर्व मंत्री हसन मुश्रीफ के विरुद्ध भी किरीट सोमैया ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था और इसकी जांच की मांग प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की थी। इसके बाद ईडी ने हसन मुश्रीफ के विभिन्न ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की थी। इसी वजह से हसन मुश्रीफ ने किरीट सोमैया की शिकायत और ईडी की कार्रवाई के विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसी मामले की सुनवाई आज हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की खंडपीठ के समक्ष हुई। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद हसन मुश्रीफ के विरुद्ध हो रही कार्रवाई 24 मार्च तक रोकने और किरीट सोमैया की न्यायिक जांच का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को भी किरीट सोमैया के संदर्भ में शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई 24 मार्च तक स्थगित कर दिया है।
