बेल्जियम ने अपनी ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए परमाणु ऊर्जा को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की योजना को रद्द कर दिया है। संसद में हुए मतदान में इस प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंज़ूरी मिली, जिसमें 102 सांसदों ने पक्ष में, केवल 8 ने विरोध में और 31 ने मतदान में भाग नहीं लिया।
ऊर्जा मंत्री मैथ्यू बिहेट ने इस फैसले को महज़ एक ऊर्जा सुधार नहीं, बल्कि देश के आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक भविष्य के लिए एक निर्णायक कदम बताया।
गौरतलब है कि 2003 में बेल्जियम ने एक कानून पास कर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को 2025 तक बंद करने की योजना बनाई थी और नए रिएक्टरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट को देखते हुए इस नीति को 10 वर्षों के लिए स्थगित कर दिया गया था। बेल्जियम ने अपने दो परमाणु संयंत्रों के एक-एक रिएक्टर को बैकअप स्रोत के रूप में चालू रखने का निर्णय लिया था।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, बेल्जियम की करीब 40% बिजली उत्पादन आज भी परमाणु ऊर्जा पर आधारित है।
इस बीच, अन्य यूरोपीय देश भी परमाणु ऊर्जा नीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं। नीदरलैंड और स्वीडन नए परमाणु संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, जबकि इटली की सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में परमाणु ऊर्जा की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया है। यह बदलाव यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है।