MAVEN को 18 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था और यह 21 सितंबर 2014 को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचा था। शुरुआत में इस मिशन को केवल एक वर्ष के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन इसने उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए 11 वर्षों से अधिक समय तक काम किया और वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराईं।
NASA के अनुसार, स्पेसक्राफ्ट से अंतिम संपर्क 6 दिसंबर 2025 को हुआ था। मंगल ग्रह के पीछे से गुजरने के बाद उसका सिग्नल अचानक बंद हो गया और फिर दोबारा स्थापित नहीं हो सका। इसके बाद एजेंसी ने स्थिति की समीक्षा और संभावित रिकवरी प्रयासों का आकलन करने के लिए फरवरी 2026 में एक विशेष एनोमली रिव्यू बोर्ड का गठन किया।
समीक्षा के बाद बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि MAVEN को दोबारा संचालित करना संभव नहीं है। शुरुआती जांच में पता चला है कि मंगल के पीछे से गुजरने के बाद स्पेसक्राफ्ट अनियंत्रित रूप से तेज गति से घूमने लगा, जिससे उसकी दिशा प्रभावित हुई और धीरे-धीरे उसकी बैटरी पूरी तरह खत्म हो गई। बैटरी समाप्त होने के कारण संचार प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया और पृथ्वी से संपर्क टूट गया।
हालांकि, NASA ने स्पष्ट किया है कि इस तकनीकी गड़बड़ी के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है और वर्ष के अंत तक एक विस्तृत अंतिम रिपोर्ट जारी की जा सकती है।
मिशन के समापन के साथ NASA अब MAVEN द्वारा एकत्र किए गए वैज्ञानिक आंकड़ों को सुरक्षित रूप से आर्काइव करने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है, ताकि भविष्य में शोधकर्ता और वैज्ञानिक इन जानकारियों का उपयोग कर सकें।
NASA के प्लैनेटरी साइंस डिवीजन की निदेशक लुईस प्रॉक्टर के अनुसार, MAVEN मिशन से प्राप्त वैज्ञानिक डेटा भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की योजना बनाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। विशेष रूप से यह जानकारी अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन से सुरक्षित रखने और उनकी सुरक्षा से जुड़े उपायों को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
करीब 11 वर्षों तक सक्रिय रहने वाला MAVEN मिशन मंगल ग्रह के वातावरण को समझने और भविष्य के मानव अन्वेषण मिशनों की नींव मजबूत करने में NASA की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
