राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों को मैं और मेरा से ऊपर उठकर हम और हमारे की भावना से काम करना चाहिए। श्रीमती मुर्मू आज जयपुर में राजस्थान विधानसभा में विशेष संबोधन दे रही थीं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि जनता बहुत उम्मीदों के साथ अपने जनप्रतिनिधियों को चुनती है। कई जनप्रतिनिधियों को बार- बार सदन में जनता का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है। जनता अपने जनप्रतिनिधि से बहुत प्रभावित रहती है। ऐसी स्थिति में उन्हें सोचना चाहिए कि वे जनता, समाज, राज्य और देश के लिए क्या कर सकते हैं। जनप्रतिनिधियों को मैं ओर मेरा से ऊपर उठकर विचार कर चाहिए कि वे अपनी जनता और देश के लिए क्या कर सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि एक समय था जब सदन में होने वाली कार्यवाही समाचार पत्रों के माध्यम से जनता तक पहुंच पाती थी। लेकिन अब आधुनिक तकनीक के युग मे सदन में होने वाली हर घटना को जनता देख पाती है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का आचरण भी जनता को समर्पित होना चाहिए। श्रीमती मुर्मू ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों पर ही हमारे संविधान के आदर्श निर्धारित किये गए हैं। न्याय, स्वतंत्रता, समता बंधुता के संवैधानिक आदर्श सभी विधायकों के मार्गदर्शक सिद्धांत होने चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि विधानसभा के सदस्यों को अपने आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सदन के समय के सदुपयोग पर जोर दिया। राज्यपाल ने सत्रावसान नहीं कर लंबे सत्र चलाने के विषय को उठाते हुए कहा कि सत्रावसान समय पर होना चाहिए और यह लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
विधानसभा स्पीकर डॉक्टर सी. पी. जोशी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। गौरतलब है कि यह पहला अवसर था जब किसी राष्ट्रपति ने राजस्थान विधानसभा को संबोधित किया है। राष्ट्रपति का आज दोपहर सीकर के खाटू श्याम मंदिर में पूजा अर्चना और दर्शन करने का कार्यक्रम है।
