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एसआईआर : आयोग के निर्देशों की अनदेखी पर ईआरओ व एईआरओ से जवाब-तलब की तैयारी

Date : 20-Jan-2026

 कोलकाता, 20 जनवरी । पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी करने वाले कुछ निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) से स्पष्टीकरण मांगने पर विचार कर रहा है। आरोप है कि दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान इन अधिकारियों ने ऐसे पहचान-पत्र स्वीकार किए, जो निर्वाचन आयोग द्वारा अनुमोदित दस्तावेजों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं थे।

निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण के समर्थन में स्वीकार्य पहचान-पत्रों की 13 दस्तावेजों की सूची स्पष्ट रूप से जारी की थी और निर्देश दिया था कि इसके अलावा किसी भी अन्य दस्तावेज को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को भी इन दिशा-निर्देशों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने को कहा गया था।

इसके बावजूद, कई मामलों में ईआरओ और एईआरओ द्वारा गैर-सूचीबद्ध दस्तावेज स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि इससे एक ओर पूरी एसआईआर प्रक्रिया में देरी हो रही है, क्योंकि ऐसे मतदाताओं को सही दस्तावेजों के साथ दोबारा बुलाना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर, कुछ स्वार्थी तत्व इसे निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाने का आधार बना रहे हैं।

आयोग का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल तय समय-सीमा प्रभावित होती है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। इसी कारण अब आयोग संबंधित ईआरओ और एईआरओ से जवाब-तलब करने की तैयारी कर रहा है।

गौरतलब है कि, मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा सोमवार को समाप्त हो चुकी है। इन पर सुनवाई की प्रक्रिया 7 फरवरी तक जारी रहेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। निर्धारित समय-सीमा को पूरा करने के लिए आयोग ने राज्य भर के 6,500 केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग 7 लाख सुनवाइयों का लक्ष्य तय किया है।

अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद निर्वाचन आयोग का पूर्ण पीठ पश्चिम बंगाल का दौरा करेगा। इसके बाद राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों की तिथियों की घोषणा किए जाने की संभावना है।


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