नई दिल्ली, 13 जुलाई । ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता को लेकर एक टीवी चैनल के जरिए मुस्लिम महिलाओं के साथ किए गए सैंपल सर्वे को बेबुनियाद, फर्जी और गुमराह करने वाला बताया है। बोर्ड का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और हिंदुत्ववादी संगठनों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हो रही बहस और सर्वे के जरिए यह जताने की कोशिश की जा रही है कि यूसीसी से सबसे ज्यादा प्रभावित मुसलमान ही होंगे। बोर्ड का कहना है कि ऐसा माहौल इसलिए पैदा किया जा रहा है ताकि समाज में हिंदू-मुस्लिम बंटवारा करके राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास ने कहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और यूसीसी की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष सुशील मोदी का बयान है कि नार्थ ईस्ट राज्यों के आदिवासियों और ईसाई समुदाय के लोगों को यूसीसी से छूट दी जा सकती है। उत्तराखंड राज्य का ड्राफ्ट मसौदा कुछ हद तक इसकी निशानदेही कर रहा है। उन्होंने कहा है कि एक बड़े न्यूज़ चैनल ने अपने एक सैंपल सर्वे के जरिए यह दावा किया है कि मुस्लिम महिलाओं की 67 प्रतिशत आबादी यूसीसी का समर्थन कर रही है। यह महिला आबादी शादी, तलाक, विरासत और बच्चे गोद लेने के मामले में पूरे देश में एक समान कानून के पक्ष में है। यह सर्वे कितना ठोस और सही है, इस पर सवाल उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सैंपल सर्वे का साइज और तरीका उसके खोखले दावे की हकीकत को बेनकाब कर देता है। 8035 महिलाओं से देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह सर्वे किया गया है, जिसमें चैनल के अनुसार बिना पढ़ी लिखी महिलाओं, ग्रेजुएट, 18 से 65 साल की उम्र की महिलाओं को शामिल किया गया है। हर राज्य से 321 महिलाओं ने इसमें भाग लिया है। इतनी कम तादाद इस बड़े ऐलान की सच्चाई को साबित करने के लिए नाकाफी है और इस पूरे सर्वे पर सवालिया निशान लगा देता है।
उनका कहना है कि इस तरह के बेबुनियाद और फर्जी सर्वे करने वाले चैनल को यह मालूम होना चाहिए कि जब 21वें लॉ कमीशन ने यूसीसी का मामला उठाया था, उस वक्त ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर चार करोड़ 83 लाख से अधिक मुसलमानों ने इसके खिलाफ एक ज्ञापन लॉ कमीशन में दाखिल किया था। उसमें दो करोड़ 73 लाख से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा देश के हर बड़े शहर में लाखों महिलाओं ने इसके खिलाफ प्रदर्शन करके ऐलान किया था कि मुसलमानों को शरीअत में किसी भी किस्म का हस्तक्षेप मंजूर नहीं है। इस तरह के फर्जी सर्वे कराकर चैनल देश के सत्ताधारी नेताओं और अन्य राजनीतिक दलों को यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यूसीसी का मुस्लिम महिलाएं समर्थन कर रही हैं, जो गलत है। उन्होंने देश के आम नागरिकों और राजनीतिक दलों से इस तरह के फर्जी सर्वे के बहकावे में नहीं आने की अपील की है।
