नई दिल्ली, 5 जुलाई सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (एमएस अधिनियम 2013) के कार्यान्वयन के मामले में दस साल बाद भी देश के 246 जिलों ने अभी तक खुद को हाथ से मैला ढोने वाला मुक्त जिला घोषित नहीं किया है। विशेष बात यह है कि इनमें से ज्यादातर जिले भाजपा शासित राज्यों से हैं। बुधवार को एमएस अधिनियम 2013 के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए आयोजित केंद्रीय निगरानी समिति की आठवीं बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई।
बुधवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में केंद्रीय निगरानी समिति की आठवीं बैठक की अध्यक्षता की। मंत्री ने सभी राज्यों एवं जिलों से अनुरोध किया गया कि वे अपने जिले को मैला ढोने से मुक्त घोषित करें। देश के 766 जिलों में से 520 जिलों ने हाथ से मैला ढोने से खुद को मुक्त जिला घोषित कर दिया है लेकिन 246 जिलों ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है। इनमें से सबसे ज्यादा जिले महाराष्ट्र (21), मणिपुर (14), अरुणाचल प्रदेश (14),असम (16),गुजरात (12),हरियाणा (07), मध्य प्रदेश (35) जम्मू-कश्मीर (14), आंध्र प्रदेश (15), ओडिशा (18), तेलंगाना (23), पश्चिम बंगाल (15) और नगालैंड (6) से हैं। बैठक में इन राज्यों को जल्दी ही इस संबंध में रिपोर्ट जारी करने को कहा गया है।
इसके साथ बैठक में समिति को सूचित किया गया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2013 और वर्ष 2018 में मैनुअल स्कैवेंजरों के दो सर्वेक्षण शुरू किए। इन सर्वेक्षणों के दौरान कुल 58,098 पात्र मैनुअल स्कैवेंजरों की पहचान की गई थी और इन सभी को एकमुश्त नकद 40,000 रुपये प्रदान किया गया है। इनमें से 22,294 मैनुअल स्कैवेंजर्स एवं उनके आश्रितों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया गया है और 2,313 मैनुअल स्कैवेंजर्स एवं आश्रितों के संबंध में पूंजीगत सब्सिडी जारी की गई है, जिन्होंने स्व-रोज़गार परियोजनाओं के लिए बैंक ऋण लिया है। इसके अलावा, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मृत्यु को कम करने के लिए 641 सफाई कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्वच्छता संबंधी परियोजनाओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी मंजूर की गई है।
उल्लेखनीय है कि मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013" (एमएस अधिनियम, 2013) सितंबर, 2013 में संसद द्वारा पारित किया गया था और दिसंबर, 2014 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य हाथ से मैला ढोने की प्रथा को उसके विभिन्न रूपों में पूरी तरह से समाप्त करना और पहचाने गए हाथ से मैला ढोने वालों का व्यापक पुनर्वास करना है।
बैठक में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री, रामदास अठावले, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग, सचिव, डीओएसजेई, राज्यों के प्रमुख सचिव एवं सचिव और केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
