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छत्तीसगढ़ प्रांत का 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग संपन्न

Date : 05-Jun-2023

रायपुर, 5 जून । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत का 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग, प्रथम वर्ष (सामान्य)_ 2023 का प्रशिक्षण वर्ग भिलाई-4 के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित था, जिसका समापन समारोह रविवार को सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में मंच पर मुख्य अतिथि प्रगतिशील सतनामी समाज के विनोद भारती, छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत संघचालक डॉ.पूर्णेन्दु सक्सेना, वर्गाधिकारी भागीरथी विश्वकर्मा, भिलाई नगर संघचालक रामजी साहू तथा मुख्य वक्ता के रूप में संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक प्रेमशंकर रहे

मंचासीन मुख्य अतिथि विनोद भारती ने कहा कि 20 दिन तक जो संघ का प्रशिक्षण प्राप्त किया है वह आपके अपने जीवन में और समाज, देश के लिए उपयोगी होगा। संघ जात-पात के भेदभाव से ऊपर उठकर सबको समान रूप से देखता है और स्वयंसेवकों के व्यवहार में समरसता दिखती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु घासीदास, संत कबीर के बताये हुए मार्ग को आज संघ के स्वयंसेवक अपने जीवन में आत्मसात किये हुए है। उन्होंने बाबा साहब आम्बेडकर को याद करते हुए समरस समाज के निर्माण में संघ की भूमिका को सराहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रेमशंकर ने उद्बोधन के प्रारंभ में ओड़िशा में हुए भीषण रेल दुर्घटना में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की। उन्होंने कहा कि आज देश का अमृतकाल प्रारंभ हुआ है। भारत की स्वतंत्रता में अपना जीवन समर्पित करने वाले सभी वीरों को स्मरण करते हुए कहा कि 1857 से लेकर 1947 तक लंबा स्वतंत्रता समर चला। छत्तीसगढ़ के महापुरुष वीर गुण्डाधुर, वीर नारायण सिंह सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दिया। उनके प्राणों की आहुति से ही हमें स्वाधीनता मिली है, यह हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए। भारत देश के बारे में कुछ भ्रम फैलाया जा रहा है, जैसे भारत की खोज वास्को डीगामा ने की। जबकि भारत तो विश्व गुरु रहा है। यह तो भगवान राम के समय की बातें हम सभी को मालूम है। स्वामी विवेकानंद जी ने विश्व बंधुत्व का संदेश पूरी दुनिया को दिया। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी ने देश के स्वाभिमान को जगाया। आज भारत के विचार ' एकम सत्य विप्र बहुधा वदन्ति और सर्वे भवन्तु सुखिनः ' को दुनिया स्वीकार कर रही है। सनातन संस्कृति व श्रेष्ठ भारत के मूल समाज को संगठित करने का काम संघ 1925 से कर रहा है।

भारत में हम सबके पूर्वज एक है। देश के सभी नागरिक के मन में राष्ट्रभक्ति के भाव जागरण में संघ सतत लगा है। समाज में अनुशासन का भाव हो, इसके लिए हम सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। यह जो आज दिख रहा है वह अंग्रेजों ने व्यवस्था दी थी कि, सब काम सरकार करेगी। ऐसा पहले नहीं था। जहां-जहां आवश्यक है वह सब काम समाज स्वाभाविक रूप से करता था। आज परिवार व्यवस्था सुदृढ़ बने, समाज में समरसता का भाव बढ़े, समाज में विद्वेष का भाव समाप्त हो। पर्यावरण संरक्षण आज की नितांत आवश्यकता है। हमने प्रकृति को विज्ञान -धर्म के साथ जोड़ा है, उससे पर्यावरण की सुरक्षा होगी। आज स्वदेशी का भाव सुदृढ़ होना आवश्यक है। सभी स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि समाज के लिए, देश के लिए अधिकाधिक समय दें जिससे भारत विश्व गुरु के स्थान को शीघ्र प्राप्त हो सके।

रविवार को संपन्न इस प्रशिक्षण वर्ग में छत्तीसगढ़ प्रांत के सभी जिलों के 285 स्थानों से 412 प्रशिक्षार्थी स्वयंसेवक सम्मिलित हुए, जिसमें महाविद्यालयीन छात्र, शालेय विद्यार्थी, कृषक , व्यवसायी, कर्मचारी थे। सभी शिक्षार्थी स्वयं का वर्गशुल्क, अपना गणवेश, आने-जाने का यात्रा व्यय स्वयं वहन कर संघ शिक्षा वर्ग में सम्मिलित हुए। यहाँ की दिनचर्या प्रातः 4 बजे से रात्रि 10 बजे दीप निर्वाण तक विभिन्न बौध्दिक कार्यक्रमों तथा शारीरिक कार्यक्रमों में दंड संचालन, निःयुद्ध(कराटे), पदविन्यास, दंड युद्ध आदि विषयों का प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण वर्ग 14 मई दोपहर से प्रारम्भ होकर 04 जून सुबह दीक्षांत समारोह तक आयोजित हुआ।

 


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