गांधीनगर, 31 जनवरी। स्कूल ऑफ इंटीग्रेटेड कोस्टल एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी स्टडीज व राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी द्वारा इंटीग्रेटेड कोस्टल एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी एंड ओशन अवेयरनेस विषय पर तीन सप्ताह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ। इस कार्यक्रम में भारतीय तटरक्षक बल के 10 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कोस्ट गार्ड रीजन (नॉर्थ-वेस्ट) के कमांडर इंस्पेक्टर जनरल टी. सशी कुमार, टीएम तथा आरआरयू के कुलपति और संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) बिमल एन. पटेल उपस्थित रहे। प्रो. पटेल ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समुद्र को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में समझने, बदलते अंतरराष्ट्रीय कानूनों और उभरती चुनौतियों- जैसे मानव रहित समुद्री प्रणालियां, समुद्र स्तर में वृद्धि, अवैध व अनियमित मछली पकड़ना तथा समुद्री आतंकवाद से निपटने की क्षमता विकसित करते हैं। उन्होंने इसे विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अपने संबोधन में इंस्पेक्टर जनरल सशी कुमार ने वर्ष 2025 में भारतीय तटरक्षक बल और आरआरयू के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लेख किया और पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रमों से मिले सकारात्मक परिणामों की सराहना की। उन्होंने समुद्र प्रताप जहाज के कमीशनिंग का उदाहरण देते हुए अधिकारियों से भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को निरंतर तैयार रखने का आह्वान किया।
समापन समारोह में आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. कल्पेश वंद्रा तथा डीआईजी प्रशांत शर्मा, टीएम (आईसीजी), चीफ ऑफ स्टाफ, आरएचक्यू (एनडब्ल्यू) उपस्थित रहे। इस अवसर पर सफल अधिकारियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
एसआईसीएमएसएस के निदेशक (प्रभारी) अंकुर शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण में कक्षा शिक्षण के साथ फील्ड ट्रेनिंग, मूट कोर्ट अभ्यास, महासागर नेविगेशन सिम्युलेटर और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का शैक्षणिक भ्रमण भी शामिल था।
कार्यक्रम के अंत में जूनियर रिसर्च ऑफिसर जागृति सरस्वत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और आयोजन टीम के योगदान की सराहना की।
