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अब सिर्फ नारा नहीं बल्कि वास्तविकता बन चुका है महिला सशक्तिकरण: राष्ट्रपति

Date : 11-Feb-2023

भुवनेश्वर, 10 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ एक नारा हो कर नहीं रह गया है बल्कि वास्तविकता बन चुकी है। कला, साहित्य, संगीत, नृत्य, खेल, विज्ञान व अन्य क्षेत्रों में महिलाओं ने सफलता हासिल की है। महिला व पुरुष में किसी प्रकार अंतर नहीं है।

राष्ट्रपति मुर्मु शुक्रवार को यहां रमा देवी महिला विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी उत्कर्षता को प्रमाणित किया है। संसद में भी महिलाओं की संख्या एक सौ से अधिक हुई है। इस शिक्षण संस्थान की छात्रा रहीं राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अपने अतीत के स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल पद पर रहते हुए वह दो बार इस संस्थान में आयी थी। वह एक जनजातीय गांव से आकर राजधानी के इसी महिला महाविद्यालय में पढ़ी थीं। उस समय मुख्यमंत्री की बेटी समेत गरीब किसान की बेटी भी यहां पढ रही थी। किसी में कोई फर्क नहीं था। उन्हें वह दिन अभी भी य़ाद है। उन्होंने कहा कि उस समय 25 पैसे की मूंगफली लेना उनके लिए बडी बात थी। उन्होंने अपने अध्यापकों का भी जिक्र किया।

दीक्षांत समारोह को कुलाधिपति तथा राज्यपाल प्रो. गणेशीलाल, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री रोहित पुजारी ने भी संबोधित किया। राज्य सरकार के मंत्री अशोक पंडा भी इस अवसर पर मौजूद थे।

दीक्षांत समारोह से पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने यहां ज्ञान प्रभा मिशन के स्थापना दिवस समारोह को भी संबोधित किया था। यहां उन्होंने कहा था कि ज्ञान प्रभा मिशन मातृशक्ति के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। देश के प्रसिद्ध योगी परमहंस योगानंद जी की माता जी के नाम पर इस संस्थान का स्थापना की गई है। इस तरह के संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में शामिल होकर उन्हें काफी आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार देना आवश्यक है। इसमें परिवार व विशेषकर माताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि जब तक हम आत्मा की शुद्धि पर ध्यान नहीं देंगे तब तक शरीर की शुद्धि नहीं हो सकती। शरीर व आत्मा दोनों को हमें शुद्ध रखना होगा। शरीर की शुद्धि लिए हम काफी कुछ करते हैं। आत्मा की शुद्धि के लिए बाहरी चीजों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि योग व ध्यान की आवश्यकता है।'


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