नई दिल्ली, 10 जनवरी (हि.स.)। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) ने आज बैठक की और जोशीमठ में स्थिति की समीक्षा की।
इस दौरान कैबिनेट सचिव ने जोर देकर कहा कि प्रभावित क्षेत्र में सभी लोगों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता होनी चाहिए। संवेदनशील ढांचों को सुरक्षित तरीके से गिराया जाना चाहिए। सभी अध्ययन और जांच समन्वित और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
कैबिनेट सचिव ने मुख्य सचिव को आश्वासन दिया कि सभी केंद्रीय एजेंसियां आवश्यक सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगी।
वहीं केंद्रीय गृह सचिव ने समिति को अवगत कराया कि सीमा प्रबंधन सचिव के नेतृत्व में गृह मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम स्थिति के आकलन के लिए जोशीमठ में है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने समिति को सूचित किया कि सीबीआरआई, जीएसआई, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, एनआईडीएम और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान ने स्थिति का आकलन करने के लिए 6 और 7 जनवरी को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने जिला प्रशासन से भी उनकी आवश्यकताओं को समझने के लिए बातचीत की।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने एनसीएमसी को वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त घरों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को समायोजित करने के लिए जोशीमठ और पीपलकोटी में राहत आश्रयों की पहचान की गई है। राज्य सरकार द्वारा उचित मुआवजा और राहत उपाय प्रदान किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया है। जोशीमठ नगर पालिका क्षेत्र और उसके आसपास के निर्माण कार्यों को भी अगले आदेश तक रोक दिया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को जिला प्रशासन को उनके राहत और पुनर्वास प्रयासों में मदद करने के लिए तैनात किया गया है।
