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तंबुओं की नगरी में आस्था का जयकारा, यहां ठंड भी ठिठकने को मजबूर

Date : 10-Jan-2023

- प्रयागराज में कल्पवासियों के सम्मुख जानलेवा शीतलहरी नतमस्तक, अनुष्ठान निर्बाध गति से जारी
- माला फूल बेच रहे बच्चों की राह नहीं रोक पा रहे घने कोहरे, सरकारी अमला भी मुस्तैद
प्रयागराज, 10 जनवरी (हि.स.)। हाड़ कपाने वाली ठंड और जानलेवा शीतलहरी ने घने कोहरे की चादर के साथ पिछले कई दिनों से समूचे उत्तर प्रदेश के सामान्य जनजीवन को ठप सा कर रखा है। लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। आम शहरी रजाई से हांथ भी बाहर निकालने से कतरा रहे हैं, लेकिन तीर्थराज प्रयाग में संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में प्रवास कर रहे कल्पवासी और संत-महात्मा इससे बेखौफ हो अपनी तपश्चर्या में तल्लीन हैं। उनकी नियमित दिनचर्या और धार्मिक अनुष्ठानों पर प्रकृति का यह व्यवधान बेअसर सा है।
संगम समेत गंगा के विभिन्न स्नान घाटों पर स्नानार्थियों के पूजा-पाठ के लिए अपनी-अपनी चौकियों पर बैठे तीर्थ पुरोहित, गंगा में घुटने तक ठंडे पानी के अंदर घंटों खड़े होकर माला-फूल, दूध और अन्य पूजन सामग्री बेचने वाले छोटे-छोटे बच्चे तथा व्यवस्था में लगा सरकारी अमला एवं पुलिस के जवानों का भी यह शीतलहरी कुछ नहीं कर पा रही है। सभी अपने काम में मुस्तैदी से तैनात हैं। शायद कातिल ठंड तंबुओं की नगरी में आमद कराने से पहले ही ठिठक गई है अथवा यहां पहुंचकर आस्था के सामने वह भी नतमस्तक है।
मास पर्यंत चलने वाले माघ मेले में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर सैकड़ा के करीब आयु वाले बुजुर्ग भी प्रवास कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के बैतूल जिला की 99 वर्षीया सुगा माई सिसोदिया तो अपने चार पीढ़ियों के साथ कल्पवास कर रही हैं। दिन में तीन बार वह अपने शिविर से व्हील चेयर से संगम स्नान के लिए जाती हैं। भीषण शीतलहर में भी वह ब्रह्म मुहूर्त में ही डुबकी लगाती हैं। ठंड के बाबत पूछने पर कहती हैं, ‘‘सब गंगा मइया की कृपा है।’’ सुगा माई ही नहीं बल्कि सांस के रोग से पीड़ित अमरनाथ, 80 वर्षीय अमर बहादुर, 90 साल की सुशीला देवी और सच्चिदानंद जैसे तमाम श्रद्धालु हैं, जो गंगा मइया के आंचल में प्रवास कर कल्पवास का पूरा अनुष्ठान विधि विधान से सम्पन्न कर रहे हैं। इन सबकी आस्था ठंड पर भारी पड़ रही है।
तीर्थ पुरोहित और माला-फूल बेचने वाले बच्चे भी ठंड से बेखौफ
मेला क्षेत्र में आ रहे आम श्रद्धालु और कल्पवासियों की आस्था ही कड़ाके की ठंड पर भारी नहीं पड़ रही बल्कि यहां संगम सहित गंगा के विभिन्न स्नान घाटों पर ठंडे पानी के अंदर घुसकर माला-फूल और पूजन सामग्री बेचने वाले छोटे-छोटे बच्चे एवं घाटों पर पूजन कराने के लिए बैठे तीर्थ पुरोहितों को भी हाड़ कपाने वाली शीतलहरी बाधा नहीं बन पा रही है। ठंडे पानी में घंटों खड़े रहकर माला-फूल बेचने वाला मात्र 12 साल का रवि कहता है, ‘‘साहब ठंड से डरेंगे तो परिवार का खर्चा कैसे चलेगा? भोर में ही यहां आ जाते हैं और शाम तक दो-तीन सौ रुपये की कमाई हो जाती है।’’
संगम घाट के तीर्थ पुरोहित पंडित यज्ञ नारायण बताते हैं कि मौसम अनुकूल रहे अथवा प्रतिकूल वे लोग प्रतिदिन भोर में तीन से चार बजे के बीच अपनी-अपनी चौकियों पर विराजमान हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रमुख स्नान पर्वों पर तो सभी तीर्थ पुरोहित आधी रात में ही अपने-अपने घाटों पर आ जाते हैं। पंडित यज्ञ नारायण कहते हैं कि माघ मेला और कुंभ के आयोजन तीर्थ पुरोहितों के महापर्व हैं। इस एक माह के मेले से उनके परिवार का सालभर का खर्च निकलता है।
सरकारी कर्मी, सेवाधर्मी और पुलिस के जवान भी रहते हैं मुस्तैद
मेला क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी हों या पुलिस के जवान अथवा अन्य सेवाधर्मी, ये सभी ठंड के कहर से बेखौफ होकर दिन-रात अपने कार्य में लगे रहते हैं। पुलिस विभाग के तमाम जवान और अधिकारी तो आस्था के चलते प्रत्येक वर्ष स्वयं अपनी ड्यूटी मेला क्षेत्र में लगवाते हैं। मेला कंट्रोल रूम के प्रभारी भगीरथ यादव चंदौली से यहां ड्यूटी पर आये हैं। भगीरथ बताते हैं कि सेवा भाव और आस्था के चलते पिछले कई वर्षों से वह स्वयं अपनी ड्यूटी मेले में लगवाते हैं और प्रतिदिन भोर में ही ड्यूटी पर तैनात होने से पहले चाहे जितनी ठंड हो संगम में डुबकी जरूर लगाते हैं। इनके अलावा इंस्पेक्टर गंगा प्रसाद, दरोगा मनोहर शुक्ला और हेडकांस्टेबल रामसनेही जैसे तमाम ऐसे पुलिसकर्मी हैं जो पिछले कई साल से मेले में आ रहे हैं और ड्यूटी के साथ स्नान-ध्यान का भी पुण्य लाभ लेते हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र में तमाम समाजसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवक भी प्रवास करते हैं। वे सब भी पुण्य लाभ के लिए लगातार सेवा कार्य में लगे रहते हैं।
संगम की रेती पर हर साल लगता है दुनिया का यह अद्भुत मेला
तीर्थराज प्रयाग में संगम की रेती पर दुनिया का यह अद्भुत मेला प्रत्येक वर्ष माघ के महीने में लगता है। कभी-कभी इसकी अवधि डेढ़ महीने की हो जाती है। इस दौरान गंगा के आंचल में तंबुओं का एक अलग शहर बस जाता है। कुंभ के दौरान तो इस नगर की आबादी दुनिया के कई देशों से अधिक हो जाती है। कोरोना काल में भी सरकार ने इस मेले को प्रतिबंधित नहीं किया था। इस बार का माघ मेला लगभग 700 हेक्टेयर में बसाया गया है। पूरा मेला क्षेत्र छह सेक्टर में बंटा है। हर सेक्टर में एक सेक्टर मजिस्ट्रेट के साथ एक डिप्टी एसपी की भी तैनाती की गई है। पूरे मेला क्षेत्र में 10 सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। स्नानार्थियों की सुविधा के लिए संगम क्षेत्र में और गंगा के किनारे कुल 14 स्नान घाट बनाये गये हैं। ठंड से बचाव के लिए जगह-जगह अलाव की भी व्यवस्था है। मेले की सुरक्षा के लिए करीब पांच हजार पुलिस फोर्स की तैनात की गई है। माघ मेले में 14 थाने, 38 पुलिस चौकियां और 15 फायर स्टेशन बनाए गए हैं। संगम क्षेत्र में एटीएस और एसटीएफ के कमांडो तैनात हैं। पूरे मेला क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की जा रही है।


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