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सैन्य अभ्यास 'डस्टलिक' के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी उज्बेकिस्तान रवाना

Date : 15-Apr-2024

 नई दिल्ली, 15 अप्रैल । भारतीय सेना उज्बेकिस्तान गणराज्य के टर्मेज में होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ में हिस्सा लेने के लिए सोमवार को रवाना हो गई। उज्बेकिस्तानी सेना के साथ 28 अप्रैल तक होने वाला अभ्यास का 5वां संस्करण वार्षिक कार्यक्रम है, जो वैकल्पिक रूप से भारत और उज्बेकिस्तान में हर साल किया जाता है। इसका अंतिम संस्करण पिछले साल फरवरी में पिथौरागढ़ (भारत) में आयोजित किया गया था। थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे भी आज ही उज्बेकिस्तान गणराज्य के लिए चार दिनों की यात्रा पर रवाना हुए हैं।

कर्नल सुधीर चमोली ने बताया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ में भारतीय सशस्त्र बल के 60 कर्मी हिस्सा लेंगे। भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व जाट रेजिमेंट की एक बटालियन करेगी, जिसमें 45 जवान होंगे। भारतीय टुकड़ी में वायु सेना के भी 15 कर्मी शामिल होंगे। इसी तरह उज्बेकिस्तानी सेना और वायु सेना की टुकड़ी में 100 कर्मी होंगे। उज्बेकिस्तान की टुकड़ी का प्रतिनिधित्व दक्षिण-पश्चिम सैन्य जिले के हिस्से और दक्षिणी ऑपरेशनल कमांड के कर्मी करेंगे। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे का 18 अप्रैल को टर्मेज में संयुक्त अभ्यास 'डस्टलिक' देखने का कार्यक्रम है।

उन्होंने बताया कि ‘डस्टलिक’ अभ्यास का उद्देश्य सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना, पहाड़ी और अर्ध शहरी इलाकों में संयुक्त अभियानों को अंजाम देने के लिए संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाना है। यह उच्च स्तर की शारीरिक फिटनेस, संयुक्त योजना, संयुक्त सामरिक अभ्यास और विशेष हथियार कौशल की बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सामरिक अभ्यास में संयुक्त कमांड पोस्ट का निर्माण, खुफिया और निगरानी केंद्र की स्थापना, लैंडिंग साइट की सुरक्षा, विशेष हेलीबोर्न संचालन, घेरा और खोज संचालन और अवैध संरचनाओं के विध्वंस शामिल होंगे।

एक्सरसाइज डस्टलिक के इस संस्करण की जटिलता को मल्टी डोमेन ऑपरेशन के संचालन के साथ बढ़ाया गया है, क्योंकि दल में इन्फैंट्री के अलावा लड़ाकू सहायक हथियारों और सेवाओं के कर्मी शामिल हैं। दो महिला अधिकारी भी भारतीय दल का हिस्सा हैं, जिनमें एक आर्टिलरी रेजिमेंट से और दूसरी आर्मी मेडिकल कोर से हैं। अभ्यास 'डस्टलिक' दोनों पक्षों को संयुक्त अभियान चलाने की रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं में अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने में सक्षम बनाएगा। इससे रक्षा सहयोग का स्तर बढ़ने के साथ ही दोनों मित्र देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा।


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