नेपाल के कोशी प्रांत की सरकार का विश्वासमत फिर विवादों में घिर गया है। विपक्ष ने सरकार के विश्वासमत को असंवैधानिक करार देते हुए इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
कोशी प्रांत की उद्धव थापा सरकार ने 93 सदस्यीय प्रांतीय असेंबली में हाल में विश्वासमत हासिल किया था। बहुमत के लिए जरूरी 47 सदस्यों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया था। स्पीकर ने इसको मान्यता भी दे दी, लेकिन प्रमुख विपक्षी दल सीपीएन (यूएमल) ने मत विभाजन के दौरान सभा की अध्यक्षता कर रहे सदस्य के सरकार के पक्ष में मतदान किए जाने को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कोशी प्रांत में यह दूसरी बार है जब सरकार के विश्वास मत का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री उद्धव थापा ने सदन में विश्वास मत हासिल किया था। उस समय भी स्पीकर ने सरकार के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन विपक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई तो कोर्ट ने स्पीकर के वोट देने को असंवैधानिक बताते हुए सरकार का विघटन कर दिया था।
इस बार विश्वास मत के मद्देनजर सत्ता पक्ष ने पहले तो स्पीकर का इस्तीफा कराया, उनको मंत्री बनाया और फिर से विश्वास का मत हासिल किया। इस बार प्रोटेम स्पीकर ने सदन में पहले मतदान की प्रक्रिया शुरू कराई। पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने मतदान किया और जब अपने मत पर पुनर्विचार के लिए पांच मिनट का समय दिया गया उस समय किसी और सदस्य को स्पीकर के आसन पर बिठा कर प्रोटेम स्पीकर ने सरकार के पक्ष में मतदान किया, जिससे सरकार के पक्ष में आवश्यक 47 सदस्यों का मत मिल पाया।
उल्लेखनीय है कि कोशी प्रांत में पिछले तीन महीने में तीन सरकारों का गठन हो चुका है। तीन महीने में तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा विश्वास मत हासिल किया जा चुका है, लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी मत विभाजन की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है।
प्रमुख विपक्षी दल सीपीएन (यूएमल) के प्रदेश संसदीय दल के नेता हिक्मत कार्की ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सत्ता पक्ष ने असंवैधानिक तरीके से विश्वास का मत हासिल किया है।
