काठमांडू, 13 जून । नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड' और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई के खिलाफ युद्ध अपराध करने के आरोप में दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने प्रचंड और भट्टराई को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की जज सपना मल्ला प्रधान ने इस मुद्दे पर प्रचंड और भट्टराई से प्राथमिकता के आधार पर लिखित जवाब मांगा है।
तत्कालीन माओवादी लड़ाके लेनिन बिष्ट की ओर से दायर याचिका पर आज सुनवाई शुरू हो गई है। रविवार को याचिका पंजीकृत की गई थी। हालांकि उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही रिट याचिका खारिज कर दी थी ।
लेनिन बिस्ट ने दायर याचिका में कहा है कि उन्हें बाल सैनिक के तौर पर इस्तेमाल कर युद्ध अपराध किया गया है। बिस्ट ने रिट में उल्लेख किया कि उन्हें बाल सैनिक होने के आधार पर युद्ध शिविर से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
लेनिन बिष्ट 13 साल की उम्र में 2002 में माओवादी सशस्त्र संघर्ष के दौरान सेना में शामिल हुए थे। नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन के सत्यापन में 2973 लोगों को बाल सैनिकों के रूप मे सूचीबद्ध किया गया था। रिट में कहा गया है कि माओवादियों ने बड़ी संख्या में बाल सैनिकों का इस्तेमाल किया ।
नेपाल में माओवादी सशस्त्र गतिविधियां 2006 में समाप्त हो गईं। शांति प्रक्रिया के दौरान जब माओवादी लड़ाकों को समायोजित किया गया तो यूएन ने बाल सैनिकों को अयोग्य घोषित कर दिया। इसी आधार पर बाल सैनिकों के इस्तेमाल का विषय उठाया गया है।
