मंगोलिया में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली जब संसद ने देश के प्रधानमंत्री ज़ंदनशतार गोम्बोजाव और संसदीय अध्यक्ष अमरबायसगालन दाशज़ेगवे को पद से हटाने के लिए मतदान किया। संसाधनों से भरपूर इस देश में यह घटनाक्रम शासन प्रणाली और भ्रष्टाचार को लेकर बढ़ती चिंताओं का परिणाम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ज़ंदनशतार, जिन्होंने महज चार महीने पहले जून में पद संभाला था, संसद में विश्वास मत हारने के बाद पद से हट गए। उनकी विवादास्पद नियुक्ति—न्याय और गृह मामलों के नए मंत्री को लेकर—ही संकट की शुरुआत मानी जा रही है। 50 से अधिक सांसदों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रस्ताव लाया, जिसमें संवैधानिक उल्लंघनों और प्रशासनिक चिंताओं का हवाला दिया गया।
उनसे पहले के प्रधानमंत्री एल. ओयुन-एर्डीन ने भ्रष्टाचार के आरोपों और जनता के विरोध प्रदर्शनों के चलते इस्तीफा दिया था। ज़ंदनशतार को उस समय देश के 32वें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था।
प्रधानमंत्री की बर्खास्तगी के ठीक एक दिन बाद संसद अध्यक्ष अमरबायसगालन दाशज़ेगवे ने भी इस्तीफा दे दिया, जिसे संसद ने मतदान के बाद स्वीकार कर लिया। दोनों नेता सत्तारूढ़ मंगोलियन पीपुल्स पार्टी (MPP) के सदस्य हैं, जिसने खुद अमरबायसगालन के खिलाफ जांच की मांग की थी।
अब राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना को नया प्रधानमंत्री नामित करना होगा, जिसे स्टेट ग्रेट खुराल (मंगोलियाई संसद) की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
हाल के वर्षों में भ्रष्टाचार, शासन में पारदर्शिता की कमी और आर्थिक सुस्ती के चलते जनता में असंतोष गहराया है, जिसने देश की राजनीतिक स्थिरता को बार-बार चुनौती दी है।
