विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आगाह किया है कि 2024 में वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगा। संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से 2024 के बीच वैश्विक CO₂ की औसत सांद्रता 3.5 भाग प्रति मिलियन (ppm) बढ़ेगी — जो 1957 में आधुनिक मापन की शुरुआत के बाद से एक वर्ष में सबसे बड़ी वृद्धि है।
यह रिपोर्ट अगले महीने ब्राज़ील में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से ठीक पहले प्रकाशित की गई है, जिससे वैश्विक समुदाय को जलवायु संकट की गंभीरता का अंदाज़ा हो सके।
WMO के अनुसार, जीवाश्म ईंधनों का दहन और विशेष रूप से दक्षिण अमेरिका में जंगलों की भीषण आग ने इस वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई है। WMO के उप महासचिव को बैरेट ने बताया कि CO₂ और अन्य ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में गर्मी को फँसा रही हैं, जिससे जलवायु अस्थिर हो रही है और चरम मौसम की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अन्य प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों — मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड — की सांद्रता भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है।
WMO की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी ओक्साना तारासोवा ने कहा कि वायुमंडल में एक बार जमा हो जाने के बाद, CO₂ कई दशकों तक बना रहता है। हालांकि लगभग 50% CO₂ को जंगल, भूमि और महासागर जैसे प्राकृतिक कार्बन सिंक सोख लेते हैं, लेकिन इनकी यह क्षमता अब घट रही है।
तारासोवा ने अमेज़न वर्षावनों की स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण वहाँ के पेड़ तनावग्रस्त हो गए हैं। उन्होंने कहा, "जब पेड़ पानी की कमी और अत्यधिक तापमान से जूझते हैं, तो वे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते, जिससे वे CO₂ को अवशोषित नहीं कर पाते।"
WMO की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो वैश्विक तापमान में वृद्धि और जलवायु आपदाओं की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ सकती हैं।
