बांग्लादेश में मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में 15 सैन्य अधिकारी हिरासत में, अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का गिरफ्तारी वारंट | The Voice TV

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बांग्लादेश में मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में 15 सैन्य अधिकारी हिरासत में, अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का गिरफ्तारी वारंट

Date : 12-Oct-2025

ढाका – बांग्लादेशी सेना ने पुष्टि की है कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों और जबरन गुमशुदगी के मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद 15 सैन्य अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। इनमें 14 वर्तमान में सेवारत अधिकारी हैं, जबकि एक सेवानिवृत्ति तक अवकाश पर हैं।

ढाका छावनी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में, मेजर जनरल मोहम्मद हकीमुज़्ज़मान ने बताया कि यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा विपक्षी नेताओं के लापता होने और कथित यातना से जुड़े मामलों में 30 व्यक्तियों के खिलाफ वारंट जारी किए जाने के बाद की गई है।

एक अन्य अधिकारी, मेजर जनरल कबीर, ने सेना के नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है और वर्तमान में उनका कोई अता-पता नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि:

  • ICT द्वारा दर्ज दो अलग-अलग मामलों में आरोप लगाए गए हैं कि 2009 के बाद सत्ता में आई अवामी लीग सरकार के दौरान दर्जनों विपक्षी नेताओं को ग़ैरक़ानूनी रूप से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया

  • 17 आरोपियों पर RAB के तहत TFI सेल में यातना देने का आरोप है, जबकि 13 अन्य JIC (संयुक्त पूछताछ सेल) से संबंधित समान आरोपों का सामना कर रहे हैं।

  • कुल 30 में से 25 आरोपी सैन्य अधिकारी हैं, वर्तमान या पूर्व सेवा में।

सेना की प्रतिक्रिया:

मेजर जनरल हकीमुज़्ज़मान ने कहा,

“बांग्लादेश सेना भी मानवता के विरुद्ध अपराधों जैसे गुमशुदगी और हत्याओं की उचित न्यायिक सुनवाई चाहती है। हम न्याय, निष्पक्षता और जवाबदेही के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेना को ICT की आधिकारिक चार्जशीट अभी प्राप्त नहीं हुई है और वर्तमान हिरासतें मीडिया तथा सोशल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर की गई हैं।

“चार्जशीट प्राप्त होने के बाद, हम विवरणों की समीक्षा करेंगे और अगली कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेंगे,” उन्होंने कहा।

यह घटनाक्रम बांग्लादेश की सेना और न्याय प्रणाली के लिए संवेदनशील और ऐतिहासिक मोड़ की तरह देखा जा रहा है, जहां संस्थागत जवाबदेही और मानवाधिकारों की दिशा में गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं।


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