जापान में मौसमी फ्लू ने गंभीर रूप ले लिया है, जिसके चलते सरकार ने देशभर में फ्लू महामारी घोषित कर दी है। 4,030 से अधिक पुष्ट मामले सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया। फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य तंत्र और शैक्षणिक संस्थानों पर असर डालना शुरू कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर के लगभग 3,000 अस्पतालों से फ्लू के मामलों की सूचना मिली है। ओकिनावा में प्रति अस्पताल सबसे अधिक मरीज़ दर्ज किए गए हैं, जबकि टोक्यो और कागोशिमा अन्य प्रमुख प्रभावित क्षेत्र हैं।
प्रमुख प्रभाव:
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100 से अधिक स्कूल, किंडरगार्टन और चाइल्डकैअर सेंटर बंद कर दिए गए हैं, विशेष रूप से बच्चों में संक्रमण की ऊँची दर को देखते हुए।
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स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे संक्रमण की निगरानी करते हुए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करें।
सरकारी प्रतिक्रिया:
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को फ्लू के लक्षणों की त्वरित पहचान और रिपोर्टिंग के लिए सतर्क रहने को कहा है। साथ ही, टीकाकरण अभियान को तेज़ करने और जनता को मास्क पहनने, भीड़ से बचने और हाथ धोने जैसे सावधानी उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संक्रमण की गति यही रही, तो आने वाले हफ्तों में अस्पतालों पर दबाव और बढ़ सकता है।
जापान में घोषित यह फ्लू महामारी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। बच्चों में बढ़ते मामलों और स्कूलों के बंद होने से यह संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियाँ स्थिति पर कड़ी नजर रख रही हैं और संक्रमण पर काबू पाने के लिए व्यापक प्रयास कर रही हैं।
