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पाकिस्तान सरकार ने पीओके प्रदर्शनकारियों की अधिकतर मांगें मानीं, समझौते पर किए हस्ताक्षर

Date : 04-Oct-2025

इस्लामाबाद, 4 अक्टूबर। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अधिकतर मांगें मान ली हैं और शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही पीओके में बीते कई दिनों से चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन खत्म हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीओके में कई दिनों से चल रही अशांति को समाप्त करने के लिए संघीय सरकार के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेके-जेएएसी) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते पर हस्ताक्षर उच्चस्तरीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल और जेके-जेएएसी के बीच दो दिनों में दो दौर की वार्ता के बाद किए गए। समझाैते के बाद प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने कहा कि सभी मुद्दों का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान हो गया है। वार्ता में शामिल संघीय सरकार के संसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने शनिवार को एक्स पोस्ट में कहा कि हमारे वार्ता प्रतिनिधिमंडल ने जेके-जेएएसी के साथ एक अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रदर्शनकारी अपने घर लौट रहे हैं। सभी सड़कें फिर से खुल गई हैं। मंत्री ने कहा कि यह शांति की जीत है। उन्होंने एक्स पर समझौते की प्रति भी साझा की, जिसमें वार्ता के दाैरान लिए गए 12 निर्णयों और 13 अतिरिक्त बिंदुओं का जिक्र है।समझौते में कहा गया है कि एक और दाे अक्टूबर की विभिन्न घटनाओं में मारे गए लोगों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के बराबर आर्थिक लाभ दिया जाएगा। साथ ही गोली लगने से घायल लोगों को प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा जबकि प्रत्येक मृतक के परिवार के एक सदस्य को 20 दिनों के भीतर सरकारी नौकरी दी जाएगी।गाैरतलब है कि इससे पहले जेके-जेएएसी, पीओके सरकार और संघीय मंत्रियों के बीच उच्च वर्ग के विशेषाधिकारों और शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को लेकर पिछले हफ़्ते हुई वार्ता विफल हो गई थी। तब से विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। पीओके में बीते कई दिनों से हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और सैंकड़ों घायल हुए।इससे पहले पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा था कि वह पीओके में जारी हिंसा से बेहद चिंतित है और उसने अत्यधिक बल प्रयोग और संचार व्यवस्था ठप होने की निंदा की थी।


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