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बलोच राष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान के तीन मुखबिरों को मौत की सजा सुनाई

Date : 29-Sep-2025

क्वेटा (बलोचिस्तान) पाकिस्तान, 29 सितंबर । बलोच राष्ट्रीय न्यायालय ने तीन बलोच नागरिकों गुलाम हुसैन, दौलत खान और इशाक निचारी को राजद्रोह का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। तीनों ने माना है कि वह लंबे समय से पाकिस्तान की फौज के लिए मुखबिरी करते रहे हैं। बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़कों ने पुख्ता सूचना के बाद इन लोगों को उनके घरों से उठा लिया था। बलोच राष्ट्रीय न्यायालय के फैसला सुनाने के बाद तीनों को फांसी पर लटका दिया गया या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

द बलोचिस्तान पोस्ट (पश्तो भाषा) की रिपोर्ट में बीएलए के प्रवक्ता जैंद बलोच ने गुलाम हुसैन, दौलत खान और इशाक निचारी को बलोच राष्ट्रीय न्यायालय से मौत की सजा सुनाने की पुष्टि की है। सजा का फैसला किस तारीख को सुनाया गया, यह स्पष्ट नही किया गया है। बलोच प्रवक्ता ने मीडिया को जारी बयान में फैसले में मौत की सजा का दावा करते हुए कहा कि संगठन के लड़ाकों ने राज्य की खनन संपदा का उत्खनन कर उन्हें ढोकर ले जाने वाले पाकिस्तान की संघीय सरकार के तमाम वाहनों को फूंक दिया गया। जैंद बलोच ने कहा कि लड़ाकों ने सोराब, कलात, नुश्की, जहरी और खारन में आठ जगह पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया। इस दौरान लड़ाकों ने केंद्रीय राजमार्ग पर नियंत्रण कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि बलोच लिबरेशन आर्मी के कमांडरों ने नुश्की में बादल करीज क्रॉस पर नाकाबंदी कर रहे पाकिस्तानी सेना के जवानों पर सशस्त्र हमला किया। इसके अलावा कमांडरों ने कलात के खजानई इलाके में खनिजों से लदे एक वाहन को निशाना बनाया और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। जैंद ने बताया कि 26 सितंबर को लड़ाकों ने क़लात के ज़वाह इलाके में कब्जा कर रही पाकिस्तानी सेना पर घात लगाकर हमला किया।

प्रवक्ता के अनुसार, ज़ोहरी में अभियान के दौरान मुखबिरी के शक में गुलाम हुसैन पुत्र मेहरदाल जातक सकना स्ट्रीट, ज़ोहरी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। हुसैन ने स्वीकार किया कि वह एक साल से पाकिस्तानी सेना के लिए कभी कादिर तो कभी अयूब बनकर मुखबिरी कर रहा था। दौलत खान ने स्वीकार किया कि उसने सेना के लिए मुखबिरी कर युवाओं को जबरन गायब करने में मदद की। लड़ाकों ने मंगचर के कलात में अली मोहम्मद सकना कोहक के बेटे इशाक निचारी को भी शक पर उठाया।निचारी ने स्वीकार किया कि वह पाकिस्तान की सेना के साथ छापों में शामिल रहता था।


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