भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण पर कड़ा प्रतिवाद करते हुए उसे "बेतुका नाटक" करार दिया और कहा कि कोई भी प्रचार या नाटक सच्चाई को नहीं छिपा सकता।
भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शरीफ ने एक बार फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया है, जो लंबे समय से पाकिस्तान की विदेश नीति का केंद्रीय स्तंभ रहा है।
पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप
सुश्री गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान का आतंकवाद से जुड़ा रिकॉर्ड जगजाहिर है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में इस्लामाबाद की भूमिका और अप्रैल 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तानी संरक्षण में काम कर रहे आतंकी संगठन 'रेजिस्टेंस फ्रंट' को बचाने की कोशिशों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा,
"अगर पाकिस्तान भारत के साथ शांति के प्रति ईमानदार है, तो उसे पहले आतंकी शिविर बंद करने होंगे और भारत में वांछित आतंकवादियों को सौंपना होगा।"
"नफरत फैलाने वाला देश उपदेश न दे"
गहलोत ने तीखे शब्दों में कहा कि यह विडंबना है कि नफरत, कट्टरता और असहिष्णुता को बढ़ावा देने वाला देश आस्था और मानवाधिकारों पर दुनिया को उपदेश देने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान भारतीय सेना द्वारा बहावलपुर और मुरीदके में मारे गए आतंकवादियों की तस्वीरों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क की पोल खोली।
हालिया संघर्ष पर भारत का जवाब
शहबाज शरीफ द्वारा भारत के साथ हालिया तनाव पर दिए गए बयान को गहलोत ने "विचित्र और भ्रामक" बताया। उन्होंने कहा कि:
"9 मई तक पाकिस्तान हमले की धमकियां दे रहा था, लेकिन 10 मई को उसकी सेना ने खुद संघर्ष विराम की अपील की। इस बीच भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को नष्ट कर दिया।"
उन्होंने व्यंग्यपूर्वक कहा कि यदि जले हुए हैंगर और टूटे हुए रनवे किसी की नजर में जीत हैं, तो पाकिस्तान उसका जश्न मना सकता है।
आतंकवाद पर भारत का दो-टूक रुख
गहलोत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के कुछ मंत्रियों ने हाल ही में दशकों से आतंकी शिविर चलाने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है। उन्होंने भारत के रुख को स्पष्ट किया:
"आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों में कोई अंतर नहीं किया जाएगा। भारत आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर कायम है और परमाणु धमकी की आड़ में आतंक को पनपने नहीं देगा।"
द्विपक्षीय वार्ता पर भारत का रुख
भारत ने दोहराया कि भारत और पाकिस्तान दोनों लंबे समय से इस बात पर सहमत हैं कि सभी लंबित मुद्दे द्विपक्षीय रूप से सुलझाए जाएंगे, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी — यही भारत का दीर्घकालिक और स्पष्ट रुख है।
गहलोत ने अंत में कहा कि पाकिस्तान अतीत की तरह आज भी भारत में निर्दोष नागरिकों पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार है और भारत ने अपने नागरिकों की रक्षा का अधिकार पूरी मजबूती से निभाया है।
यह बयान वैश्विक मंच पर भारत के इस स्पष्ट संदेश को रेखांकित करता है कि वह आतंकवाद के खिलाफ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा, चाहे वह कूटनीतिक मोर्चा हो या सैन्य।
