आज, 27 सितंबर को दुनिया भर में विश्व पर्यटन दिवस 2025 मनाया जा रहा है। इस वर्ष का विषय 'पर्यटन और सतत परिवर्तन' (Tourism and Green Transformation) रखा गया है, जो पर्यटन क्षेत्र की उस शक्ति को रेखांकित करता है जो न केवल आर्थिक समृद्धि, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय सुधारों के लिए भी प्रभावी हो सकता है।
पर्यटन: सांस्कृतिक सेतु और आर्थिक इंजन
1970 में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) के कानूनों को अपनाने की याद में यह दिवस हर साल मनाया जाता है। पहली बार इसे 1980 में मनाया गया था। इस अवसर का उद्देश्य है –
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लोगों को जोड़ना,
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना,
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और यह समझाना कि कैसे पर्यटन सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में योगदान दे सकता है।
भारत में पर्यटन की स्थिति
भारत ने भी हाल के वर्षों में पर्यटन को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कई प्रयास किए हैं:
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जून 2025 तक, देश में आगंतुकों की संख्या 16.5 लाख तक पहुंच गई,
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जबकि विदेश यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या 84.4 लाख दर्ज की गई।
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इस गतिविधि से ₹51,532 करोड़ की विदेशी मुद्रा आय अर्जित की गई।
पर्यटन का जीडीपी में योगदान
राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी 2025 के अनुसार, 2023-24 में पर्यटन क्षेत्र का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान ₹15.73 लाख करोड़ रहा, जो देश की कुल अर्थव्यवस्था का 5.22% है। यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रोज़गार सृजन, सांस्कृतिक कूटनीति और पर्यावरणीय जागरूकता में भी अहम भूमिका निभाता है।
‘पर्यटन और सतत परिवर्तन’ का यह विषय हमें याद दिलाता है कि यात्रा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सतत विकास की ओर एक ठोस कदम भी हो सकता है। इस दिशा में नीतिगत सुधारों, हरित तकनीक के उपयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही हम एक बेहतर, अधिक समावेशी पर्यटन उद्योग का निर्माण कर सकते हैं।
