श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने न्यूयॉर्क में आयोजित 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में अपने पहले संबोधन में वैश्विक समुदाय से युद्ध, गरीबी, भ्रष्टाचार और नशीली दवाओं के ख़िलाफ़ एकजुट होकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने गाज़ा में जारी मानवीय संकट पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल युद्धविराम, मानवीय सहायता के निर्बाध प्रवाह और बंधकों की रिहाई की माँग की। साथ ही, उन्होंने 1967 की सीमाओं पर आधारित दो-राज्य समाधान का समर्थन दोहराया।
राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि वैश्विक स्तर पर गरीबी और असमानता अब आपदाओं का रूप ले चुकी हैं, जिनका शीघ्र समाधान आवश्यक है। उन्होंने नशीली दवाओं की तस्करी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और अधिक पुनर्वास केंद्रों की स्थापना की अपील की।
भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल लोकतंत्र को कमजोर करता है, बल्कि विकास में भी बाधा डालता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि राष्ट्रों को जवाबदेही की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रपति ने बताया कि श्रीलंका ने पहले ही भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक सशक्त अभियान शुरू कर दिया है। देश में शासन को पारदर्शी बनाने और आने वाली पीढ़ियों को सत्ता के दुरुपयोग से मुक्त प्रणाली देने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति दिसानायके मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में भाग लेने अमेरिका पहुंचे।
