भारत ने ढाका के खिलखेत इलाके में स्थित दुर्गा मंदिर के विध्वंस को लेकर बांग्लादेश की मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कड़ी आलोचना की है। नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि चरमपंथी तत्वों के दबाव में मंदिर को गिराने की अनुमति देना बेहद निंदनीय है।
जायसवाल ने कहा कि अंतरिम सरकार ने मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय इसे "अवैध भूमि उपयोग" का मामला बताकर कार्रवाई को जायज़ ठहराने की कोशिश की। मंदिर को तोड़े जाने की अनुमति आज दी गई, जिससे देवता की मूर्ति को स्थानांतरित करने से पहले ही नुकसान पहुंचा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह घटना दर्शाती है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ इस प्रकार की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, जो बेहद चिंता का विषय है।
भारत ने बांग्लादेश सरकार से आग्रह किया कि वह अपने देश में हिंदू समुदाय, उनकी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और पड़ोसी संबंधों के लिहाज से आवश्यक है।
इससे पहले इसी सप्ताह, बांग्लादेश अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस (HRCBM) ने दिनाजपुर जिले में महास्त्री मनसा और दुर्गा मंदिर में हुई तोड़फोड़ को उजागर किया था। संगठन ने इसे हिंदू अल्पसंख्यकों को आतंकित करने वाला भयावह कृत्य बताया।
भारत ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
