तेल बाजार में उथल-पुथल: ईरानी हमले के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित, कीमतों में 6% की गिरावट
ईरान द्वारा कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस अल उदीद पर किए गए जवाबी हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी गिरावट देखी गई। यह गिरावट पिछले पांच वर्षों में दर्ज की गई सबसे तीव्र एकल-दिवसीय गिरावट है, जिसमें तेल कीमतें 6% से अधिक लुढ़क कर 5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
हालांकि सप्ताहांत में बढ़ते तनाव के चलते तेल बाजारों में शुरुआत में तेजी दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि ईरानी कार्रवाई सैन्य ठिकानों तक सीमित रही और ऊर्जा अवसंरचना को निशाना नहीं बनाया गया, बाजारों में व्यापक बिकवाली शुरू हो गई।
तेहरान की रणनीति: सैन्य लक्ष्य, आर्थिक स्थिरता
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने हमले से पहले कतर के अधिकारियों के साथ समन्वय किया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमला केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित रहे। विश्लेषकों का मानना है कि यह एक सोच-समझकर उठाया गया कदम था, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता फैलने से रोकना था।
कतर एनर्जी के शिपमेंट या उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और न ही अन्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबर मिली है। इसके अलावा, ईरान ने तेल पाइपलाइनों, तेल सुविधाओं या रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को छेड़ा नहीं, जिससे वैश्विक आपूर्ति बाधित नहीं हुई।
बाजार की प्रतिक्रिया: जोखिम प्रीमियम में तेज कटौती
ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा खतरा न होने के कारण निवेशकों और व्यापारियों ने सप्ताहांत में लगे जोखिम प्रीमियम को तेजी से घटा दिया। इस प्रक्रिया में तेल कीमतों में बड़ी गिरावट आई, जिसने बाजार को आश्वस्त किया कि संघर्ष फिलहाल ऊर्जा अवसंरचना को प्रभावित नहीं करेगा।
इस विकास ने तेल आयातकों के लिए कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव का पूरी तरह से समाप्त न होना संकेत देता है कि बाजार अभी भी अस्थिर बना रह सकता है।
