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होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट: ईरान की संसद ने अमेरिकी हमलों के जवाब में बंदी को दी मंजूरी

Date : 23-Jun-2025

वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका के बीच, ईरान की संसद ने एक निर्णायक कदम उठाते हुए अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के प्रतिशोध स्वरूप होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है, और इसे बंद करने की मंजूरी एक संभावित विनाशकारी भू-राजनीतिक मोड़ का संकेत देती है, जो वैश्विक आर्थिक प्रणाली को गंभीर रूप से अस्थिर कर सकता है।

यह प्रस्ताव अमेरिका के फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान स्थित परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों की प्रतिक्रिया में आया है। हालांकि, इस नाकाबंदी को लागू करने का अंतिम निर्णय ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पास है, जिसने अभी तक कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान की इस कार्रवाई की तीव्र आलोचना करते हुए इसे "आर्थिक आत्महत्या" करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने पर अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रुबियो ने चीन से अपील की कि वह तेहरान पर दबाव डाले, ताकि यह मार्ग खुला रह सके — खासकर ऐसे समय में जब चीन स्वयं ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है।

इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर तुरंत दिखने लगा है। तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं और विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर नाकाबंदी जारी रही तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो सकती हैं। शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा जोखिम के चलते अपने जहाजों को हाई अलर्ट पर रखा है।

इस बीच, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को और मजबूत कर दिया है। पेंटागन ने संकेत दिए हैं कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए संभावित नौसैनिक टकराव की तैयारी कर रहा है, क्योंकि इसका लगातार बंद रहना न केवल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी गहरा खतरा है।

ईरानी संसद का यह निर्णय 1980 के दशक के 'टैंकर युद्ध' के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है, जब ईरान और इराक ने अपने युद्ध के दौरान वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। आज का यह संकट, एक ऐसे समय में उभरा है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर हैं और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। होर्मुज की नाकाबंदी विश्व अर्थव्यवस्था के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी कर सकती है।


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