बांग्लादेश के चटगाँव में एक अदालत ने इस्कॉन के पूर्व नेता और बांग्लादेश सम्मिलितो सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को वकील सैफुल इस्लाम की हत्या के मामले में गिरफ्तार दिखाने का आदेश दिया है। वर्तमान में चिन्मय दास जेल में हैं और वर्चुअल सुनवाई के दौरान उन्हें अदालत में पेश किया गया, हालांकि उनकी ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था।
यह आदेश मामले की जांच कर रहे अधिकारी की याचिका पर आधारित है, जिसे चटगाँव मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने वर्चुअल सुनवाई के बाद मंजूरी दी। चिन्मय दास पिछले पांच महीनों से देशद्रोह के एक मामले में हिरासत में हैं। उन्हें 25 नवंबर, 2024 को ढाका से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए और उनकी रिहाई की मांग की।
चिन्मय की ज़मानत याचिका पहले ही अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी थी। इस फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें उनके समर्थकों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के बीच झड़पें हुईं। इसी दौरान वकील सैफुल इस्लाम अलिफ पर जानलेवा हमला हुआ, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। इसके बाद चिन्मय और अन्य के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
हाल ही में, 30 अप्रैल को हाई कोर्ट की एक बेंच ने चिन्मय को देशद्रोह मामले में जमानत दी, लेकिन उसी दिन सरकार ने चैंबर कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की। चैंबर जज ने अस्थायी रूप से जमानत पर रोक लगा दी, जिसे बाद में हटा लिया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील के निधन के कारण रविवार को होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी गई।
इस बीच, बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक और धार्मिक तनाव के बीच स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी) सहित कई संगठन चिन्मय की जमानत रद्द करने और इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कट्टरपंथी समूह इस मांग को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
चिन्मय कृष्ण दास ने हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए देशभर में कई आंदोलनों और जनसभाओं का नेतृत्व किया है। विशेष रूप से 25 अक्टूबर को चटगाँव और 22 नवंबर को रंगपुर में हिंदू समुदाय की बड़ी रैलियों ने देशभर में चर्चा पैदा कर दी थी। 30 अक्टूबर को उनके खिलाफ चटगाँव में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया, जिसमें आरोप था कि उन्होंने एक रैली में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराया।