भारत और श्रीलंका के बीच लोकतांत्रिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 24 सदस्यीय श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है। नई दिल्ली में आयोजित एक सप्ताह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग लेने आए प्रतिनिधिमंडल से भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त संतोष झा ने मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल में श्रीलंकाई संसद के उपसभापति डॉ. रिजवी सालेह, विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 सांसद, और संसद के चार वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इंडिया हाउस में हुई इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के साझा प्रयासों पर चर्चा की गई।
प्रतिभागी इस कार्यक्रम के तहत भारतीय संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में विधायी प्रक्रियाओं, बजटीय प्रणाली और संसदीय समितियों से जुड़े विशेष सत्रों में भाग लेंगे। साथ ही वे भारत की संस्कृति, डिजिटल प्रगति, आईटी, ऊर्जा और शहरी गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में हुई विकास यात्रा को भी समझने का अवसर पाएंगे।
यह कार्यक्रम पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान की गई उस घोषणा का हिस्सा है, जिसमें श्रीलंकाई पेशेवरों के लिए 700 वार्षिक प्रशिक्षण स्लॉट की पेशकश की गई थी। यह पहल मौजूदा समझौता ज्ञापन का पूरक है, जिसके अंतर्गत पांच वर्षों में 1500 श्रीलंकाई सिविल सेवकों को प्रशिक्षित किया जाना है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत-श्रीलंका के संबंधों में बढ़ते विश्वास और संस्थागत सहयोग को दर्शाता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और साझा विकास लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।