क्या आप जानते हैं कि ईरान और इजराइल के बीच होने वाले संघर्ष सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ने वाला है। अगर इन दोनों देशों के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है तो डॉलर में मजबूती आएगी और भारतीय रुपया कमजोर हो जाएगा। इससे विश्व में तो मुद्रास्फीति बढ़ेगी लेकिन भारत में न केवल महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाएगी बल्कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में तनाव तो उसी समय बढ़ गया था जब हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया था। उसके बाद इजराइल ने गाजा पटटी पर हमास ने तबाड़तोड़ हमले किए। लेकिन जिस तरीके से इजराइल ने 1 अप्रैल 2024 को सीरिया स्थित ईरान के दूतावास पर हमला किया, उससे पश्चिम एशिया में तनाव गहरा गया । ईरान ने इसकी प्रतिक्रिया इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन से सीधा हमला कर दिया। उसके बाद इजराइल ने ईरान पर जवाबी हमला किया। इस संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया में तो जबरदस्त तनाव तो है लेकिन इस संघर्ष का असर भारत सहित संपूर्ण विश्व पर पड़ना तय है।
हम यह भलीभांति जानते हैं कि आज अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देश अपने हथियारों के व्यापार को चमकाने के लिए किसी न किसी के साथ खड़े हैं। इन देशों की विदेश और रक्षा नीति में यह रणनीति और मंशा होती है कि विश्व में कहीं न कहीं युद्ध चलता रहने चाहिए ताकि उनके हथियारों की आपूर्ति ऐसे देशों में होती रहे और उनके देश की अर्थव्यवस्था सशक्त बनी रहे।
इजराइल व ईरान के बीच युद्ध का इन दोनों देशों पर तो विपरीत असर पड़ेगा लेकिन इन दोनों देशों के बाद इसका सबसे प्रतिकूल असर भारत में कच्चे तेल की कीमतों पर वृद्धि के तौर पर पड़ेगा। आज भारत कच्चे तेल का विश्व में तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। विश्व को कुल कच्चे तेल का एक-तिहाई हिस्सा पश्चिम एशिया से ही मिलता है। ईरान और इजराइल के बीच चलने वाले संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के कारण परिवहन महंगा हो जाता है और इसका सीधा असर अन्य उत्पादों की कीमतों पर पड़ने लगता है। अगर यह संघर्ष लंबा चला तो डॉलर की स्थिति मजबूत होगी और भारतीय रुपया कमजोर हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ईरान लेबनान में हिजबुल्ला, यमन में हूती और फिलिस्तीन में हमास आतंकी संगठनों को समर्थन देता है और समय-समय पर वह उनकी मदद भी लेता है। ऐसी स्थिति में ईरान इन संगठनों की मदद फारस खाड़ी से खुले महासागर में जाने वाले एक मात्र समुद्री स्ट्रेट को बाधित कर सकता है। और अगर ऐसा होता है तो वैश्विक स्तर पर व्यापारिक आवागमन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ना भी तय है।
इस बात में सोलह आने सत्यता है कि विगत दस वर्षों से इजराइल के साथ भारत के काफी घनिष्ठ संबंध रहे हैं। इजराइल भारत को आतंकवाद के खिलाफ सहयोग देता रहा है। भारत इजराइल से रक्षा उपकरणों की भी आपूर्ति लेता रहा है। इजराइल भारत का एशिया में दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक दोस्त है। इजराइल में लगभग 20 हजार भारतीय रहते हैं। वहां पर साफ्टवेयर प्रोफेशनल्स, हीरा व्यापारी, स्टूडेंट्स और मजदूर रहते हैं। जब हमास से संघर्ष के बाद इजराइल ने फिलिस्तीनियों के अपने देश में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया तो भारत ने अनेक भारतीय यहां से भेजे जो इजराइल में बुजुर्गों की देखभाल कर रहे हैं। इसके अलावा भारत में भी भारी संख्या में यहूदी रहते हैं। इसलिए भारत के लिए इजराइल बहुत अहम है।
दूसरी ओर भारत ईरान का बहुत पुराना मित्र देश है। भारत ईरान से कच्चा तेल तो आयात करता रहा है। पूर्व सोवियत गणराज्य के हिस्सा रहे एशियाई देश कजाकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान जैसे देशों में हाईड्रोकार्बन के भंडार हैं। भारत को इन संसाधनों तक पहुंचने और इन देशों से मजबूत व्यापारिक संबंध बनाए रखने के लिए ईरान से जाने वाली मार्ग की आवश्यकता होती है। हालांकि ईरान द्वारा इस्राइल पर हमला करने के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसलिए भारत ईरान से तेल खरीदने में हिचकिचा रहा है।
लेकिन, अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद चीन ईरान से कच्चा तेल खरीद रहा है। हमने यह भी देखा था कि जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था तो अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन भारत ने इस पर स्वतंत्र निर्णय लेते हुए अपने पुराने मित्र देश रूस से कच्चा तेल खरीदना नहीं बंद किया। चूंकि भारत के लिए इजराइल और ईरान दोनों महत्वपूर्ण हैं। इसलिए उसे दोनों ही पलड़ों के बीच समन्वय एवं संतुलन बनाकर चलना पड़ेगा ताकि पश्चिम एशिया में होने वाले इस संघर्ष से भारत को कम से कम आर्थिक नुकसान हो।
लेखक : डॉ. अनिल कुमार निगम
गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि इस देश ने तीन दशक तक अस्थिरता की कीमत चुकाई है। तीन दशक तक अस्थिर सरकार चली, निर्बल प्रधानमंत्री चले। 10 साल से देश को एक मजबूत नेतृत्व मिला है, स्थिरता मिली है।
INDI गठबंधन अगर ये कहता है कि एक साल शरद पवार, एक साल ममता बनर्जी, एक साल एम के स्टालिन और कुछ बचेगा तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन जाएंगे। ये कोई परचून की दुकान नहीं है। इस तरह से देश नहीं चलता है।
देश की जनता ये जरूर सोचे कि अगर इंडी गठबंधन को बहुमत मिलता है तो पीएम कौन बनेगा। मोदी को पीएम बनाने का फल हमने देखा है। देश सुरक्षित हुआ है। दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है। देश की जनता तीसरी बार भी उन्हें चुनेगी।
PM नरेंद्र मोदी की कर्नाटक के बागलकोट में आज की चुनावी रैली के दौरान एक बच्ची तस्वीर लेकर खड़ी थी। सभा के दौरान मोदी ने SPG से कहा कि वह बच्ची से तस्वीर ले। साथ ही उस बच्ची से कहा बेटा अपना नाम और एड्रेस तस्वीर पर लिख दो, मैं आपको चिट्ठी लिखूंगा। इस पर बच्ची खुश होकर डांस करने लगी।
ओडिशा में पुरी लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार संबित पात्रा ने पुरी में चुनाव प्रचार के दौरान एक बुजुर्ग महिला के साथ डांस किया। कांग्रेस ने इस सीट से सुचरिता मोहंती को मैदान में उतारा है।पुरी में 25 मई को मतदान होगा।.
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सोमवार को अमेठी से नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। इससे पहले स्मृति अपने घर से पूजा करने के बाद रोड शो करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची और अपना नामांकन दाखिल किया। कल वे स्कूटी चलाकर भाजपा कार्यालय पहुंची थी। एक दिन पहले वे अयोध्या गई और और रामलला के दर्शन किए थे।
इंदौर में लोकसभा चुनाव से 14 दिन पहले कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने नामांकन वापस ले लिया है। यानी वे अब चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने सोमवार को भाजपा महासचिव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला के साथ कलेक्टर कार्यालय जाकर नामांकन वापस ले लिया। इंदौर में नाम वापसी का आज ही आखिरी दिन है। कलेक्टर कार्यालय से नामांकन वापस लेने के बाद अक्षय भाजपा कार्यालय पहुंचे और पार्टी में शामिल हो गए। कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर लिखा- इंदौर से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी अक्षय कांति बम का भाजपा में स्वागत है।
सूरत में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा रद्द, भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध जीते
इससे पहले गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से 22 अप्रैल को BJP कैंडिडेट मुकेश दलाल निर्विरोध चुने गए। दरअसल यहां से कांग्रेस कैंडिडेट नीलेश कुंभाणी का पर्चा रद्द हो गया था। उनके पर्चे में गवाहों के नाम और हस्ताक्षर में गड़बड़ी थी।
इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस समेत 10 प्रत्याशी मैदान में थे। 21 अप्रैल को 7 निर्दलीय कैंडिडेट ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। बीएसपी कैंडिडेट प्यारे लाल भारती ही बचे थे, जिन्होंने सोमवार 22 अप्रैल को पर्चा वापस ले लिया। इस तरह मुकेश दलाल निर्विरोध चुने गए। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, निलेश कुंभाणी भाजपा से मिले हुए थे।
दासत्व के अंधकार से भरी लंबी रात्रि के बीच यदि भारत में राष्ट्रभाव पल्लवित हो रहा तो इसके पीछे वे असंख्य विभूतियाँ हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व समर्पित करके इस दीप को जलाये रखा । कुछ ने प्राण दिये कुछ ने जाग्रति अभियान चलाये और कुछ ने संघर्ष के साधन उपलब्ध कराये । इतिहास प्रसिद्ध दानवीर भामाशाह ऐसे ही महादानी हैं । जिन्होने विषम परिस्थितियों में मेवाड़ के सुरक्षा संघर्ष के लिये अपार धनराशि उपलब्ध कराई ।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने इतिहास और अपनी प्रचीन परंपराओं के साथ अपनी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों की वास्तुकला कुछ ऐसी है कि आज भी नवीन तकनीकी और विज्ञान की सुविधाओं के बाद भी इस प्रकार की वास्तुकला को हकीकत में उतार पाना बहुत ही मुश्किल है। ऐसा ही एक मंदिर स्थित है महाराष्ट्र के औरंगाबाद की एलोरा की गुफाओं में। यह मंदिर मात्र एक चट्टान को काटकर और तराशकर बनाया गया है। हम बात कर रहे हैं एलोरा के कैलाश मंदिर की जिसे बनाने में मात्र 18 वर्षों का समय लगा। लेकिन जिस तरीके से यह मंदिर बना है, ऐसे में अनुमान यह लगाया जाता है कि इसके निर्माण में लगभग 100-150 सालों का समय लगना चाहिए।
संरचना एवं निर्माण का रहस्य
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार एलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम के द्वारा सन् 756 से सन् 773 के दौरान कराया गया। मंदिर के निर्माण को लेकर यह मान्यता है कि एक बार राजा गंभीर रूप से बीमार हुए तब रानी ने उनके स्वास्थ्य के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की और यह प्रण लिया कि राजा के स्वस्थ होने पर वह मंदिर का निर्माण करवाएँगी और मंदिर के शिखर को देखने तक व्रत धारण करेंगी। राजा जब स्वस्थ हुए तो मंदिर के निर्माण के प्रारंभ होने की बारी आई, लेकिन रानी को यह बताया गया कि मंदिर के निर्माण में बहुत समय लगेगा। ऐसे में व्रत रख पाना मुश्किल है। तब रानी ने भगवान शिव से सहायता माँगी। कहा जाता है कि इसके बाद उन्हें भूमिअस्त्र प्राप्त हुआ जो पत्थर को भी भाप बना सकता है। इसी अस्त्र से मंदिर का निर्माण इतने कम समय में संभव हो सका। बाद में इस अस्त्र को भूमि के नीचे छुपा दिया गया।
भगवान शिव का निवास माने जाने वाले कैलाश पर्वत के आकार की तरह ही इस मंदिर का निर्माण किया गया है। 276 फुट लंबे और 154 फुट चौड़े इस मंदिर को एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया है। इस चट्टान का वजन लगभग 40,000 टन बताया जाता है। मंदिर जिस चट्टान से बनाया गया है उसके चारों ओर सबसे पहले चट्टानों को ‘U’ आकार में काटा गया है जिसमें लगभग 2,00,000 टन पत्थर को हटाया गया। आमतौर पर पत्थर से बनने वाले मंदिरों को सामने की ओर से तराशा जाता है, लेकिन 90 फुट ऊँचे कैलाश मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसे ऊपर से नीचे की तरफ तराशा गया है। कैलाश मंदिर एक ही पत्थर से निर्मित विश्व की सबसे बड़ी संरचना है।
इस मंदिर में प्रवेश द्वार, मंडप तथा कई मूर्तियाँ हैं। दो मंजिल में बनाए गए इस मंदिर को भीतर तथा बाहर दोनों ओर मूर्तियों से सजाया गया है। मंदिर में सामने की ओर खुले मंडप में नंदी है और उसके दोनों ओर विशालकाय हाथी तथा स्तंभ बने हुए हैं। कैलाश मंदिर के नीचे कई हाथियों का निर्माण किया गया है और यह मंदिर उन्हीं हाथियों के ऊपर ही टिका है। इस्लामिक आक्रांता औरंगजेब ने इस मंदिर को नुकसान पहुँचाने का बहुत प्रयास किया लेकिन छोटे-मोटे नुकसान के अलावा वह इसे किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाने में असफल रहा।
मंदिर की दीवारों पर अलग प्रकार की लिपियों का प्रयोग किया गया है जिनके बारे में आजतक कोई कुछ भी नही समझ पाया। ऐसा कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में मंदिर के नीचे स्थित गुफाओं पर शोधकार्य शुरू कराया गया, लेकिन वहाँ हाई रेडियोएक्टिविटी के चलते शोध को बंद करना पड़ा। इसके अलावा गुफाओं को भी बंद कर दिया गया जो आज भी बंद ही हैं। ऐसी मान्यता है कि इस रेडियोएक्टिविटी का कारण वही भूमिअस्त्र और मंदिर के निर्माण में उपयोग किए गए अन्य उपकरण हैं जो मंदिर के नीचे छुपा दिए गए थे।
जिस तरीके से कैलाश मंदिर का निर्माण किया गया है, पुरातत्वविद यह अनुमान लगाते हैं कि इस मंदिर के निर्माण में कम से कम 100-150 वर्षों का समय लगना चाहिए। लेकिन मंदिर का निर्माण मात्र 18 वर्षों में हुआ। यही कारण है कि मंदिर के निर्माण में दैवीय सहायता की भी संभावना जताई जाती है। मंदिर से जुड़ी एक और विचित्र बात यह है कि यह भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन मंदिर में न तो कोई पुजारी है और न ही यहाँ किसी प्रकार की पूजा-पाठ की कोई जानकारी मिलती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के व्यापक परिदृश्य में भारत अपने तेज़ विकास और नई ऊंचाइयों को छूने के निरंतर संकल्प के लिए कार्यरत है। भारतीय संस्कृति की एक लंबी परंपरा है और 1.4 बिलियन से अधिक की आबादी के साथ, भारत एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में विकसित हो रहा है, जो लगातार दुनिया भर में अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है। इसमें एक विशाल, युवा आबादी के साथ-साथ एक खुली, लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली भी है। यह वर्तमान में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (पीपीपी) है और वैश्विक आर्थिक विकास में एक प्रमुख योगदानकर्ता है, फिर भी अभी महत्वपूर्ण अप्रयुक्त क्षमता है। दुनिया की आबादी के छठे हिस्से से अधिक के साथ भारत वैश्विक उत्पादन का बमुश्किल 7 फीसदी हिस्सा है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की उपलब्धियों का उसके वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक महत्व पर जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था के 2035 तक एशिया की ओर अधिक से अधिक झुकने की उम्मीद है, क्योंकि भारत, चीन और आसियान देश धीमी गति से बढ़ने वाली उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ तालमेल बिठा लेंगे। 6 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर के साथ भी, भारत की अर्थव्यवस्था 2017 की तुलना में दोगुनी से अधिक बड़ी होगी। क्रय शक्ति समता के संदर्भ में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 2016 में 7 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 13 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के बराबर लाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी वृद्धि दर रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और जापान जैसे प्रमुख देशों से अधिक है। भारत एकमात्र एशियाई अर्थव्यवस्था है जिसने महामारी शुरू होने के बाद से अपने निवेश-से-जीडीपी अनुपात में वृद्धि की है। आयात पर इसकी निर्भरता भी कम हो गई है क्योंकि प्रेषण में वृद्धि हुई है और वैश्विक क्षमता केंद्र उभरे हैं, जो व्यापार प्रक्रिया आउटसोर्सिंग में भारत की पिछली सफलता पर आधारित है। 2022 से धन प्रेषण की मात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बंद अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं के बजाय, जो कभी भारत को परिभाषित करती थी, आज अर्थव्यवस्था चीन की तुलना में अधिक खुली है और विकास के समान स्तर पर है। पिछले दशक में व्यापार भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत से अधिक रहा है, जो 1990 में 15 प्रतिशत से भी कम था।
गरीबी में कमी और रोजगार दर में वृद्धि
विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष दोनों ने भारत के विश्व स्तरीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की प्रशंसा की, जिसने सरकार को सामाजिक कार्यक्रमों पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने और कर अनुपालन बढ़ाने में मदद की है। विश्व बैंक अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार गरीबी को परिभाषित करता है, जो प्रति व्यक्ति प्रति दिन $2.15 पर अत्यधिक गरीबी, $3.65 पर निम्न-मध्यम आय और $6.85 पर उच्च-मध्यम आय निर्धारित करता है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, 2011 में भारत की गरीबी दर 22.53 प्रतिशत थी और भयानक महामारी के बाद भी यह काफी कम होकर 2021 में 11.9 प्रतिशत हो गई है। मानव विकास सूचकांक उन्नति के तुलनीय रुझान को दर्शाते हैं। पिछले दशक के दौरान फ्लशिंग शौचालय और खाना पकाने की गैस, शिशु मृत्यु दर और घरेलू बिजली तक पहुँच में काफी सुधार हुआ है। एक दशक पहले 40 फीसदी घरों में बिजली नहीं थी, आज, यह आंकड़ा 3 प्रतिशत से भी कम हो गया है।
भारत में 111 यूनिकॉर्न हैं, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 349.67 बिलियन डॉलर है। 2021 में, 45 यूनिकॉर्न का जन्म हुआ, जिनका कुल मूल्य 102.30 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जबकि 2022 में 29.20 बिलियन डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ 22 यूनिकॉर्न का जन्म हुआ। भारत वर्तमान में दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा यूनिकॉर्न बेस है। सरकार अक्षय ऊर्जा पर भी काम कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से अपनी ऊर्जा का 40% उत्पन्न करना है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, 31 दिसंबर, 2023 तक, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने लगभग 117,254 स्टार्टअप को मान्यता दी थी, जिसमें अनुमानित 111 यूनिकॉर्न शामिल थे। इन स्टार्टअप ने सामूहिक रूप से लगभग 1.24 मिलियन रोजगार सृजित किए हैं, जिसका काफी आर्थिक प्रभाव पड़ा है।
ईपीएफओ एक सामाजिक सुरक्षा संस्था है जो कर्मचारी भविष्य निधि और विविध नियम अधिनियम, 1952 के नियमों के तहत देश के संगठित कार्यबल को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा निधि के रूप में सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। सितंबर 2023 में, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत औपचारिक नौकरी सृजन इस साल अगस्त में 1.69 मिलियन से बढ़कर 1.72 मिलियन हो गया। सितंबर में 0.89 मिलियन से अधिक नए ईपीएफओ सदस्य नामांकित हुए, जिनमें से 58.9 प्रतिशत 18 से 25 वर्ष की आयु के थे। यह दर्शाता है कि देश के संगठित क्षेत्र के कार्यबल में शामिल होने वाले अधिकांश व्यक्ति युवा हैं, जिनमें से कई पहली बार कर्मचारी हैं। सोमवार, 12 फरवरी, 2024, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दस वर्षों में पिछले प्रशासन की तुलना में 1.5 गुना अधिक रोजगार सृजित किए हैं।
मोदी सरकार की पहल
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। भारत सरकार नागरिकों की वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के समग्र विकास को लाभ पहुँचाने वाली नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करने में प्रभावी रही है। पिछले कुछ दशकों में, भारत की जबरदस्त आर्थिक वृद्धि के परिणामस्वरूप निर्यात मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा, सरकार की कई प्रमुख परियोजनाएँ, जैसे मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी मिशन और कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन, भारत में अपार अवसर पैदा करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इस लिहाज से, देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार के कुछ उपाय नीचे सूचीबद्ध हैं:
22 जनवरी, 2024 को, प्रधानमंत्री मोदी ने 'प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना' की शुरुआत की। इस योजना से एक करोड़ घरों में छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएँगे।
17 सितंबर, 2023 को, प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय क्षेत्र की योजना पीएम-विश्वकर्मा की शुरुआत की। नई योजना का उद्देश्य पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को पहचान दिलाना और प्रोत्साहित करना है जो अपने हाथों और सरल औजारों का उपयोग करते हैं। इस प्रयास का उद्देश्य उनके उत्पादों की गुणवत्ता, पैमाने और पहुंच में सुधार करना है, साथ ही उन्हें एमएसएमई मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल करना है।
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारत की आर्थिक कहानी ने पूंजी निवेश के लिए सरकार के अटूट समर्थन को दिखाया, जो 2023-24 में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 37.4 प्रतिशत अधिक था। 2023-24 के बजट में पूंजीगत व्यय ने बढ़त हासिल की, जिसमें बजट अनुमान 2023-24 में 37.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10 लाख करोड़ रुपये (120.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर) हो गया, जो संशोधित अनुमान 2022-23 में 7.28 लाख करोड़ रुपये (87.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक है। चालू वित्त वर्ष में, राजस्व व्यय से पूंजीगत परिव्यय अनुपात में 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो उच्च-गुणवत्ता वाले व्यय की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। भारत के पास एक जबरदस्त आर्थिक अवसर है अगर वह ऐसा माहौल बना सके जो उन लाखों युवा भारतीयों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण और नौकरी के विकास को प्रोत्साहित करे जो श्रम क्षेत्र में प्रवेश करने वाले हैं। अगले दो दशकों में, भारत की कामकाजी आयु की आबादी लगभग 200 मिलियन बढ़कर एक अरब से अधिक हो जाने की उम्मीद है, जो दुनिया की सबसे बड़ी आबादी बन जाएगी। मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति में नौकरी चाहने वालों की तुलना में नौकरी देने वालों, कुशल युवाओं और स्नातक स्तर पर शोध और अभिनव दृष्टिकोण विकसित करने को प्राथमिकता दी गई है। इस तरह की कार्रवाइयों से बेरोजगारी दर में और कमी आएगी। भारत ने नवाचार और प्रौद्योगिकी में कुछ लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक प्रगति की है। हां, जनसांख्यिकी देश को लाभ पहुंचाती है, लेकिन वे सकल घरेलू उत्पाद के अनन्य जनरेटर नहीं होंगे। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए नवाचार और श्रमिक उत्पादकता बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। तकनीकी शब्दों में, इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था में श्रम और पूंजी की प्रति इकाई अधिक उत्पादन। 2021 और 2022 में दो वर्षों के उच्च आर्थिक विकास के बाद, भारतीय अर्थव्यवस्था कैलेंडर वर्ष 2023 के दौरान मजबूती से बढ़ती रही है। निकट अवधि की आर्थिक उम्मीद 2024 में निरंतर तेजी से विस्तार की है, जिसे घरेलू मांग में उच्च वृद्धि का समर्थन प्राप्त है।
मोदी के नेतृत्व में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
पिछले चार वर्षों में, सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के रूप में भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश चीन के मुकाबले तीन गुना रहा है। पंद्रह साल पहले, चीन में निवेश अक्सर भारत की तुलना में चार गुना अधिक था। अंतरराष्ट्रीय ज्ञान रखने वाले प्रवासी अक्सर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की ओर आकर्षित होते हैं।
पिछले दशक में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के सकारात्मक दीर्घकालिक विकास पूर्वानुमान को दर्शाता है, जिसे युवा जनसंख्या संरचना और तेजी से बढ़ते शहरी पारिवारिक आय से सहायता मिली है। यूएस डॉलर के संदर्भ में भारत का नाममात्र जीडीपी 2022 में 3.5 ट्रिलियन यूएस डॉलर से बढ़कर 2030 तक 7.3 ट्रिलियन यूएस डॉलर होने का अनुमान है। इस तीव्र आर्थिक विस्तार के कारण 2030 तक भारतीय जीडीपी जापानी जीडीपी से अधिक हो जाएगी, जिससे भारत एशिया-प्रशांत में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र के विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना 2024 अध्ययन के अनुसार, भारत की स्थिर वृद्धि के कारण 2024 में दक्षिण एशिया की जीडीपी में 5.2% की वृद्धि होने की उम्मीद है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर बैंक के मुख्य अर्ध-वार्षिक मूल्यांकन आयडीयू ने नोट किया है कि, गंभीर वैश्विक चिंताओं के बावजूद, भारत वित्त वर्ष 22/23 में 7.2 प्रतिशत की दर से सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। भारत की विकास दर जी 20 देशों में दूसरी सबसे अधिक थी, जो विकासशील बाजार अर्थव्यवस्थाओं के औसत से लगभग दोगुनी थी। इस लचीलेपन को मजबूत घरेलू मांग, महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश और बढ़ते वित्तीय उद्योग का समर्थन प्राप्त था। वित्त वर्ष 23/24 की पहली तिमाही में बैंक ऋण वृद्धि बढ़कर 15.8 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 22/23 में 13.3 प्रतिशत थी।
संघीय सरकार वाले इतने बड़े, विविधतापूर्ण देश में नीति निर्माण की चुनौतियों को देखते हुए पीएम मोदी ने कई मौकों पर कठोर परिस्थितियों और गैर-समर्थक विपक्ष के बावजूद समय पर निर्णय और नीतियों को लागू करके 1.4 बिलियन लोगों के विकास के लिए अपने समर्पण का उत्तरदायित्व निभाया है। अपने पहले कार्यकाल में उन्हें विरासत में मिली सुस्त अर्थव्यवस्था एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे सकारात्मक विकास के स्रोत में बदल दिया और अगर वे प्रधानमंत्री बने रहे तो एक बेहतरीन पथप्रदर्शक साबित होंगे।
लेखक - पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
2024 लोकसभा चुनाव के सेकेंड फेज में शुक्रवार को 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 88 सीटों पर वोटिंग होगी।
पहले इस फेज में 89 सीटों पर वोटिंग होनी थी, लेकिन मध्य प्रदेश की बैतूल सीट पर बसपा प्रत्याशी के निधन के बाद इस सीट पर अब 7 मई को चुनाव होंगे।
2019 में इन सीटों पर सबसे ज्यादा भाजपा को 50 और NDA के सहयोगी दलों ने 8 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के खाते में 21 सीटें गईं थीं। अन्य को 9 सीटें मिली थीं।
चुनाव आयोग के मुताबिक, इलेक्शन के दूसरे फेज में 1,198 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। इनमें 1,097 पुरुष और 100 महिला उम्मीदवार हैं। एक प्रत्याशी थर्ड जेंडर है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) ने 1,192 उम्मीदवारों के हलफनामे में दी गई जानकारी पर एक रिपोर्ट तैयार की। इनमें से 21% यानी 250 उम्मीदवार पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं।
390 यानी 33% उम्मीदवार करोड़पति हैं। इनके पास एक करोड़ या उससे ज्यादा की संपत्ति है। 6 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है, जबकि तीन के पास 500 से 1,000 रुपए की संपत्ति है।
167 कैंडिडेट्स पर हत्या, किडनैपिंग, 21 पर हेट स्पीच का मामला
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 फीसदी यानी 167 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन पर गंभीर मामले दर्ज हैं। गंभीर मामलों में हत्या, किडनैपिंग जैसे अपराध शामिल होते हैं। 3 उम्मीदवारों पर हत्या और 24 पर हत्या की कोशिश के मामले दर्ज हैं। 25 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें से एक पर रेप का मामला भी दर्ज है। वहीं, 21 कैंडिडेट्स पर हेट स्पीच से जुड़े मामले दर्ज हैं।
केरल के 3 कैंडिडेट्स पर सबसे ज्यादा क्रिमिनल केस
केरल के भाजपा अध्यक्ष और वायनाड सीट से उम्मीदवार के. सुरेंद्रन पर सबसे ज्यादा 243 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, राज्य की ही एर्नाकुलम सीट से भाजपा कैंडिडेट डॉ. के.एस. राधाकृष्णन पर 211 आपराधिक मामले दर्ज हैं। तीसरे नंबर पर इडुक्की सीट से कांग्रेस उम्मीदवार डीन कुरियाकोस पर 88 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
33 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति
ADR के मुताबिक, सेकेंड फेज में 1,192 उम्मीदवारों में से 390 यानी 33 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं। इनके पास एक करोड़ या उससे ज्यादा की संपत्ति है। कैंडिडेट्स के पास औसत संपत्ति 5.17 करोड़ रुपए है। 6 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है, जबकि तीन के पास 300 से 1,000 रुपए की संपत्ति है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ से निर्दलीय उम्मीदवार लक्ष्मण नागोराव पाटिल के पास कुल संपत्ति 500 रुपए है। केरल के कासरगोड़ से राजेश्वरी केआर ने 1000 रुपए और महाराष्ट्र के अमरावती से पृथ्वीसम्राट मुकींद्राव दीपवंश ने 1,000 रुपए की कुल संपत्ति घोषित की है।
केरल की वायनाड सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। 2019 में राहुल गांधी यहां से पहली बार चुनाव लड़े और जीते। हालांकि, वे अपनी परंपरागत सीट अमेठी से भाजपा की स्मृति ईरानी से हार गए। इस बार राहुल गांधी के खिलाफ I.N.D.I. ब्लॉक की एक और पार्टी CPI (M) ने महिला प्रत्याशी ऐनी राजा को उतारा है। वहीं भाजपा ने केरल के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को टिकट दिया है।
ऐनी राजा CPI महासचिव डी राजा की पत्नी हैं। एनी राजा राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने के फैसले को वामपंथी पार्टियों को कमजोर करने की साजिश करार देती हैं। वहीं सुरेंद्रन सबरीमाला आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे। उस दौरान उन्हें 21 दिन तक जेल में भी रहना पड़ा था। सुरेंद्रन पर 243 मामले दर्ज हैं।
2. तिरुवनंतपुरम, केरल
तिरुवनंतपुरम सीट पर तीन बार से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के सामने भाजपा ने केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को टिकट दिया है। राजीव 2006 से राज्यसभा के सदस्य हैं। 2018 में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुना गया और 2021 में केंद्रीय मंत्री बनाया गया। उनका पैतृक घर त्रिशूर जिले में है, हालांकि उनका जन्म अहमदाबाद में हुआ था।
शशि थरूर ने करीब 29 साल तक UN में काम कर चुके हैं। भारत सरकार ने शशि का नाम UN महासचिव पद के लिए रखा था। चुनाव में वे दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने UN से इस्तीफा दे दिया और 2009 में राजनीति में आ गए। वे मनमोहन सिंह सरकार में विदेश राज्य मंत्री और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहे हैं।
3. कोटा, राजस्थान
कोटा से भाजपा के उम्मीदवार 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला हैं। वे पिछले दो बार से जीत रहे हैं। इससे पहले कोटा दक्षिण से तीन बार विधायक भी रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने दो बार भाजपा विधायक रहे प्रह्लाद गुंजल को उतारा है। वे 21 मार्च को ही भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। वसुंधरा राजे के करीबी गुंजल कोटा-बूंदी, भीलवाड़ा, टोंक-सवाई माधोपुर से टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने पर वे कांग्रेस में आ गए।
4. जोधपुर, राजस्थान
भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह चुनाव मैदान में हैं। वे पिछले दो बार से जीतते आ रहे हैं। यहां की आठ विधानसभा सीटों में से सात पर भाजपा का कब्जा है। जोधपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह नगर है। वे यहां से पांच बार सांसद रहे हैं, लेकिन 2019 के चुनाव में उनके बेटे वैभव यहां से हार गए थे। कांग्रेस ने इस सीट पर करण सिंह उचियारड़ा को उतारा है। वे राज राजेश्वरी आशापूर्णा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। वे जोधपुर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स एसोसिशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
5. बाड़मेर, राजस्थान
बाड़मेर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी मैदान में हैं। वे 2019 में यहां से पहली बार संसद पहुंचे थे। वहीं, कांग्रेस ने उम्मेद राम बेनीवाल को टिकट दिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल के करीबी रहे उम्मेद राम बेनीवाल करीब 1 महीने पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं। तीसरी ओर रविंद्र सिंह भाटी भी निर्दलीय ताल ठोंक रहे हैं।
6. मेरठ, उत्तर प्रदेश
भाजपा ने मेरठ सीट से अरुण गोविल को मैदान में उतारा है। ‘रामायण’ सीरियल में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अरुण को तीन बार से सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काट कर प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, सपा की ओर से सुनीता वर्मा को मैदान में उतारा गया है। वे पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी हैं। दो बार टिकट बदलने के बाद सपा ने इन्हें फाइनल किया। इनमें से एक सरधना से विधायक अतुल प्रधान नामांकन तक दाखिल कर चुके थे। नामांकन के आखिरी दिन टिकट बदलकर सुनीता को दिया गया।
7. मथुरा, उत्तर प्रदेश
मथुरा से दो बार की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी को भाजपा ने तीसरी बार टिकट दिया है। स्थानीय संगठन और जनता की नाराजगी के बावजूद पार्टी ने यह कदम उठाया है। वहीं, बसपा ने कमलकांत उपमन्यु का टिकट बदलकर सुरेश सिंह को टिकट दिया है। सुरेश जांच एजेंसी ED के डिप्टी डायरेक्टर रह चुके हैं और कुछ दिन CBI में भी तैनात रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में काफी मजबूत पकड़ रही है। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष रहे सुरेश 2014 से ही भाजपा का टिकट मांग रहे थे। 2014 के चुनाव में उनकी टिकट कट गई थी।
8. राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
इस सीट पर 1999 से ही भाजपा का कब्जा है। सिर्फ 2007 में उपचुनाव के बाद कांग्रेस के देवव्रत सिंह 2 साल सांसद रहे। कांग्रेस ने इस बार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यहां से उतारा है। यूथ कांग्रेस से राजनीति शुरू करने वाले भूपेश पाटन से पांच बार के विधायक हैं। वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।
वहीं, भाजपा ने वर्तमान सांसद संतोष पांडे को दोबारा टिकट दिया हैे। 2019 में इन्हें पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे और तत्कालीन सांसद अभिषेक सिंह का टिकट काटकर मौका दिया गया था।
9. टीकमगढ़, मध्य प्रदेश
भाजपा ने टीकमगढ़ से केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक को उतारा है। वे छह बार सांसद रह चुके हैं। 2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई सीट पर खटीक लगातार जीतते आ रहे हैं। यह सीट बुंदेलखंड में आती है और पूरे टीकमगढ़, निमाड़ जिले समेत छतरपुर का भी कुछ हिस्सा आता है।
कांग्रेस ने यहां से पंकज अहिरवार को उतारा है। वे एससी मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं। 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने जतारा से टिकट मांगा था लेकिन कांग्रेस ने किरण अहिरवार पर भरोसा जताया था। इसके चलते नाराज चल रहे पंकज को पार्टी ने बड़ा मौका दिया है।
10. पूर्णिया, बिहार
बिहार की इस सीट पर कांग्रेस में अपनी पार्टी विलय कर चुके राजेश रंजन यानी पप्पू यादव निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। कारण यह है कि ये सीट गठबंधन के तहत लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के खाते में चली गई। दूसरी तरफ RJD ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) छोड़कर आईं बीमा भारती को मैदान में उतारा है। वहीं, NDA खेमे से JDU ने दो बार से जीत रहे सांसद संतोष कुमार कुशवाहा फिर से टिकट दिया है।
11. मांड्या, कर्नाटक
कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (JDS) के साथ भाजपा गठबंधन में है। यह सीट JDS के खाते में गई है। लिहाजा JDS के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। 2019 में इसी सीट से उनके बेटे निखिल कुमारस्वामी चुनाव हार गए थे। तब भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमालाथा ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने यहां से वेंकटरमणे गौड़ा (स्टार चंद्रू) को टिकट दिया है। वे पेशे से कॉन्ट्रैक्टर हैं और दूसरे चरण के चुनाव में सबसे अमीर प्रत्याशी हैं। उनके भाई गौरीबिदानूर सीट से निर्दलीय विधायक हैं।
12. बेंगलुरु उत्तर, कर्नाटक
इस सीट से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और मोदी सरकार में मंत्री रहे डी.वी. सदानंद गौड़ा सांसद हैं। भाजपा ने उनका टिकट काटकर केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे को मैदान में उतारा है। शोभा पिछले दो चुनाव उडुपी-चिकमंगलूर लोकसभा सीट से जीत रही हैं। वहीं, कांग्रेस ने IIM बेंगलुरु में प्रोफेसर रहे एम.वी. राजीव गौड़ा को उतारा है। उनके पिता राज्य विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं। वे भी 2014-2020 के बीच राज्यसभा के सदस्य रहे हैं।
देश की 543 सीटों के लिए चुनाव सात फेज में होगा। पहले फेज की वोटिंग 19 अप्रैल को और आखिरी फेज की वोटिंग 1 जून को होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। चुनाव आयोग ने लोकसभा के साथ 4 राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनाव की तारीखें भी जारी की हैं। ओडिशा में 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून को वोटिंग होगी।
लोकसभा के फर्स्ट फेज में 21 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों की 102 सीटों पर 19 अप्रैल को वोटिंग हुई। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक हुई वोटिंग में 68.29 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। 2019 के मुकाबले यह आंकड़ा 1 प्रतिशत ही कम है। 2019 में फर्स्ट फेज में 91 सीटों पर 69.43% वोटिंग हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिल्ली स्थित पार्टी दफ्तर में 2024 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का मैनिफेस्टो जारी किया। इसे 'भाजपा का संकल्प-मोदी की गारंटी' नाम दिया गया है। मोदी के साथ मंच पर जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, अमित शाह और निर्मला सीतारमण मौजूद थे।
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 6 अप्रैल को 48 पेज का घोषणा पत्र जारी किया। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया, राहुल, खड़गे और मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष पी चिदंबरम ने 5 न्याय और 25 गारंटी का ऐलान किया। पार्टी के घोषणा पत्र में मजदूरी 400 रुपए दिन करने, गरीब परिवार की महिला को साल में 1 लाख रुपए देने, MSP को कानून बनाने और जाति जनगणना कराने का जिक्र है।
