अंतिम श्वाँस तक युद्ध करके शिवाजी महाराज सुरक्षित विशालगढ़ पहुँचाया
Date : 13-Jul-2024
13 जुलाई 1660 सुप्रसिद्ध यौद्धा बाजी प्रभुजी देशपाँडे का बलिदान
लेखक - रेशम शर्मा
13 जुलाई 1660 सुप्रसिद्ध यौद्धा बाजी प्रभुजी देशपाँडे का बलिदान
किसी देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक है कि वह अपने छात्रों को तथ्य आधारित, वस्तुनिष्ठ पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराए, क्योंकि यही छात्र भविष्य के विमर्श को न केवल आगे बढ़ाते हैं, अपितु नए विमर्श की शुरुआत भी करते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि इतिहास में एकपक्षीय दृष्टिकोण से आगे बढ़कर चिंतन और तार्किक पाठ्यक्रम का विकास किया जाए। एनसीईआरटी से अपेक्षा है कि वह वर्तमान विवाद से अप्रभावित रहते हुए छात्रों के ऐतिहासिक दृष्टिकोण के विकास से संबंधित पाठ्यक्रम का विकास करेगी, न कि तथ्यों के चयन में छात्रों को उलझाएगी। पाठ्य पुस्तकें किसी देश की सरकार द्वारा दिया गया आधिकारिक कथन होती हैं। इस रूप में ये वैचारिक या सैद्धांतिक परियोजना होती है। इतिहास और राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों का पुनरीक्षण वैसे भी अधिक संवेदनशील होता है। ये विषम समकालीन प्रासंगिकता के मुद्दों पर विचार करने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करते हैं। उन्हें सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं को इतिहास के पलड़े पर तौलकर, इतिहास और वर्तमान के बीच तार्किक सामंजस्य बनाना सिखाते है। इन पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थी देश-विदेश के सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर अपने विचार बनाने का प्रयत्न करता है।
एनसीईआरटी की मूल पुस्तकों को इसी विचार के साथ रूप दिया गया था। कुल मिलाकर पाठ्यपुस्तकों से हटाई जाने वाली सामग्री, भारत के भूतकाल और वर्तमान की नकारात्मक धारणा पर आधारित है। यह मानसिकता कमजोर है, और केवल कुछ को हटाकर अपने इतिहास को बदलने का प्रयास करती है। इनके लिए भारतीय इतिहास के रचनात्मक, समावेशी, तार्किक, सुसंगत और विद्यार्थी अनुकूल संस्करण को लाना असंभव था, क्योंकि रचना में एक सकारात्मक गुण है, जिसे राजनीतिक ताकतें अकसर कम आंकती हैं।
लेखिका:- प्रियंका सौरभ
एकोपि गुणवान पुत्रो निर्गुणैश्च शतैर्वर: |
एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च तारा: सहस्रश: ||
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