पूर्व या उत्तर दिशा कि ओर मुहँ रखकर शिवलिंग बनाना चाहिए |
मिट्टी, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर पार्थिव शिवलिंग बनाएं |
इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित करके कर्पर जलाएं।
अब उस शिवलिंग पर थोड़ा सा जल अर्पित करें।
इसके बाद पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर अर्पित करें।
अब पुन: थोड़ा सा जल अर्पित करें।
संतान प्राप्ति के लिए विधि-विधान
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने 2024 के राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने की घोषणा की है , जिससे उनकी खुद की अभियान टीम और व्हाइट हाउस के कर्मचारी पूरी तरह से हैरान हैं। इस फैसले ने राजनीतिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है, जिससे डेमोक्रेटिक पार्टी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
आपको बता दे कि बीते साल 25 अप्रैल, 2023 को, जो बिडेन ने घोषणा की कि वह फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, और मतदाताओं से उन्हें "काम पूरा करने" के लिए और अधिक समय देने का अनुरोध किया - जिसमें उपराष्ट्रपति कमला हैरिस उनके साथ होंगी।
एक साल बाद और अमेरिका में चुनाव से कुछ महीने पहले - मतदान 5 नवंबर को निर्धारित है - बिडेन ने एक बार फिर एक घोषणा की, इस बार, संभवतः अमेरिकी राजनीति को उलट कर यह कहकर कि वह दौड़ से बाहर हो रहे हैं ।
उन्होंने अपनी जगह भारतीय मूल की कमला हैरिस को समर्थन दिया है| कमला हैरिस वर्तमान में अमेरिका की पहली भारतवंशी अश्वेत उपराष्ट्रपति हैं| उन्हें फीमेल ओबामा भी कहा जाता है| देखा जाए तो कमला हैरिस, अमेरिका में काफी प्रसिद्ध हैं|
आइये जानते है कमला हैरिस के बारे में -
उपराष्ट्रपति बनने की कहानी-
कमला हैरिस (Kamala Harris) ने अमेरिका की पहली महिला, पहली भारतवंशी, पहली अश्वेत उपराष्ट्रपति (Vice President ) बनकर इतिहास रच दिया है| ‘फीमेल ओबामा' (Female Obama) के नाम से लोकप्रिय हैरिस सीनेट की सदस्य भी पहली बार ही बनी थीं| नवम्बर 2020 में अपनी जीत के बाद ऐतिहासिक भाषण में हैरिस ने अपनी दिवंगत मां श्यामला गोपालन, भारत की एक कैंसर शोधकर्ता और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने उनके राजनीतिक करियर में इस बड़े दिन के लिए उन्हें तैयार किया था| उन्होंने यह भी कहा था कि वह उपराष्ट्रपति पद पर काबिज होने वाली पहली महिला हो सकती हैं, लेकिन वह अंतिम नहीं होंगी|
कमला हैरिस का सफर
हैरिस (59) ने कई मिसालें कायम की है| वह सैन फ्रांसिस्को की डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी बनने वाली पहली महिला, पहली भारतवंशी और पहली अफ्रीकी अमेरिकी हैं| राष्ट्रपति चुनाव (America Presidential Election 2020) के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) की ओर से उम्मीदवार रहे जो बाइडेन (Joe Biden) ने अगस्त में उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के रूप में हैरिस को चुना था| अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी बाइडेन की किसी समय हैरिस कटु आलोचक थीं| 59 वर्षीय हैरिस सीनेट के तीन एशियाई अमेरिकी सदस्यों में से एक हैं| ओबामा के कार्यकाल में वह ‘फीमेल ओबामा' के नाम से लोकप्रिय थीं|
कमला का भारत से कनेक्शन-
20 अक्टूबर 1964 को जन्मी कमला देवी हैरिस की मां श्यामला गोपालन 1960 में भारत के तमिलनाडु से यूसी बर्कले पहुंची थीं, जबकि उनके पिता डोनाल्ड जे हैरिस 1961 में ब्रिटिश जमैका से इकोनॉमिक्स में स्नातक की पढ़ाई करने यूसी बर्कले आए थे| यहीं अध्ययन के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और मानव अधिकार आंदोलनों में भाग लेने के दौरान उन्होंने विवाह करने का फैसला कर लिया|
कमला हैरिस की पढ़ाई-
हाई स्कूल के बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) से पढ़ाई करने वाली कमला अभी सात ही बरस की थीं, जब उनके माता-पिता एक दूसरे से अलग हो गए| कमला और उनकी छोटी बहन माया अपनी मां के साथ रहीं और उन दोनों के जीवन पर मां का बहुत प्रभाव रहा| हालांकि वह दौर अश्वेत लोगों के लिए सहज नहीं था|
भारत से जुड़ी रहीं कमला-
कमला और माया की परवरिश के दौरान उनकी मां ने दोनों को अपनी पृष्ठभूमि से जोड़े रखा और उन्हें अपनी साझा विरासत पर गर्व करना सिखाया| वह भारतीय संस्कृति से गहरे से जुड़ी रहीं| बाइडेन-हैरिस की प्रचार वेबसाइट पर इस संबंध में कमला ने अपनी आत्मकथा ''द ट्रुथ्स वी होल्ड'' में लिखा है कि उनकी मां को पता था कि वह दो अश्वेत बेटियों का पालन पोषण कर रही हैं और उन्हें सदा अश्वेत के तौर पर ही देखा जाएगा, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों को ऐसे संस्कार दिए कि कैंसर रिसर्चर और मानवाधिकार कार्यकर्ता श्यामला और उनकी दोनों बेटियों को ''श्यामला एंड द गर्ल्स'' के नाम से जाना जाने लगा|
अमेरिका में कमला का बोलबाला-
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन के बाद हैरिस ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की| 2003 में वह सैन फ्रांसिस्को की शीर्ष अभियोजक बनीं| 2010 में वह कैलिफोर्निया की अटॉर्नी बनने वाली पहली महिला और पहली अश्वेत व्यक्ति थीं| 2017 में हैरिस कैलिफोर्निया से जूनियर अमेरिकी सीनेटर चुनी गईं| कमला ने 2014 में जब अपने साथी वकील डगलस एम्पहॉफ से विवाह किया तो वह भारतीय, अफ्रीकी और अमेरिकी परंपरा के साथ साथ यहूदी परंपरा से भी जुड़ गईं|
संस्कृति समाज का मूल होती है। संस्कृति और सभ्यता का विकास मनुष्य के अपने प्रयत्नों का परिणाम है। लेकिन पीछे कुछेक वर्षों में आधुनिकता के नाम पर सुस्थापित जीवन मूल्यों को कमतर देखा जा रहा है। भारत में प्रचलित आधुनिक सभ्यता पश्चिमी देशों की जीवन शैली की नकल है। शब्द आधुनिकता कालबोधक है। इतिहास के सम्यक अध्ययन के लिए काल विभाजन जरूरी होता है। जैसे प्राचीन काल, मध्यकाल और आधुनिक काल। यह विभाजन सामान्य है। इसके पहले प्रागैतिहासिक काल भी है। इसी तरह वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल जैसे विभाजन भी हैं। 'आधुनिक'-काल स्थिर इकाई नहीं है। आधुनिक काल विदा होता रहता है और मध्यकाल में समाता रहता है। भारत का आधुनिक काल भारत के ही मध्यकाल का विस्तार है। इसी तरह मध्यकाल भी। वैदिक काल व प्रागैतिहासिक काल मध्य काल में प्रकट होते हैं। जीवन विकास के प्रारंभिक चरण से लेकर आधुनिक काल तक समाज में बड़े परिवर्तन आए हैं। संप्रति हम लोग भारत के आधुनिक काल में सक्रिय हैं। हमारी अनुभूति, सामाजिक मूल्य, जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण और सोच विचार में पूर्ववर्ती सामाजिक मूल्यों की ही पुर्नप्रतिष्ठा है। आज का समाज बीते कल के समाज का विस्तार है। भारत की आधुनिकता हमारी प्राचीनता का ही प्रसाद है। पश्चिमी देशों ने भारत के प्राचीन समाज के मूल्यों को अपमानित करने का प्रयास किया है। ऋग्वेद के रचनाकाल के पहले यहां सबको आनंदित करने वाली विश्ववरेण्य संस्कृति थी। तबसे लेकर आधुनिक काल तक यहां लगातार सांस्कृतिक निरंतरता है। भारत की आधुनिकता इसी सांस्कृतिक निरंतरता का परिणाम होनी चाहिए।
संस्कृति और सभ्यता जाग्रत मनुष्यों के कर्मतप का विकास है। संस्कृतियां कभी-कभी व्यापक रूप में दूसरे समाज को भी प्रभावित करती हैं और प्रभावित होती भी हैं। भारतीय संस्कृति में विश्व को एक परिवार जानने और तद्नुसार व्यवहार और आचरण करने की प्रकृति है।
संस्कृति में विश्व के सभी प्राणियों का लोकमंगल आराध्य है। इसलिए भारतीय संस्कृति का प्रभाव दुनिया के अनेक देशों पर पड़ा। भारतीय संस्कृति का प्रवाह नेपाल, भूटान, श्रीलंका, कंबोडिया, चंपा और मलेशिया तक व्यापक था। इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। इंडोनेशियाई आज भी भारतीय संस्कृति के प्रति अनुरागी हैं। जापान, कोरिया, मंगोलिया, साइबेरिया, इंग्लैंड, आयरलैंड, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया जैसे राज्य भारतीय संस्कृति के प्रशंसक रहे। दक्षिण अफ्रीका, फिजी, मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद आदि देश इस प्रभाव के साक्षी हैं। भारतीय संस्कृति का अध्ययन राष्ट्र राज्य की सीमाओं से बंधकर नहीं किया जा सकता। संस्कृति विचारधारा से नहीं बनती। अरस्तू, प्लेटो और अलेक्सजेंडर का ग्रीक राष्ट्र कहां है? ग्रीक में दर्शन था। सुंदर विचार पद्धति थी। योग्यता थी। लेकिन सांस्कृतिक राष्ट्रभाव नहीं था। रूस के साथ भी यही बात लागू है। रूस एक राज्य था। जार गया। राजव्यवस्था कम्युनिस्ट हो गई। सांस्कृतिक राष्ट्रभाव नहीं था। सोवियत रूस बिखर गया। रूस बचा है। चीन में दार्शनिक समृद्धि थी। 'ताओ ते चिंग' जैसा दार्शनिक ग्रंथ लाओत्सु ने लिखा था। कम्युनिस्ट राजव्यवस्था के कारण चीन राष्ट्र नहीं बन सका।
कम्युनिस्ट पंथ के जन्मदाता कार्ल मार्क्स ने दुनिया के सामने अपना विशेष दृष्टिकोण रखा था। उन्हीं मार्क्स ने भारत को यूरोपीय मूल्य की भाषाओं और पंथों का जन्म स्थान मानते हुए 1853 में लिखा था, ''हम निश्चयपूर्वक न्यूनाधिक सुदूर अवधि में उस महान और दिलचस्प देश को पुर्नजीवित होते देखने की आशा कर सकते हैं। जहां के सज्जन निवासी राजकुमार सालितकोव के शब्दों में, ''इटालियन लोगों से अधिक चतुर और कुशल हैं।'' यहां के निवासियों की अधीनता भी एक शांत गरिमा से संतुलित रहती है और जिन्होंने अपने सहज आलस्य के बावजूद अंग्रेज अफसरों को अपनी वीरता से चकित कर दिया। इन सज्जन निवासियों का देश हमारी भाषाओं और हमारे धर्म का उद्गम है और जहां पर प्राचीन जर्मन का स्वरूप जाट में और प्राचीन यूनानियों का स्वरूप ब्राह्मण में प्रतिबिंबित है।'' (मार्क्स: एंजेल्स-द फर्स्ट इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस-पृष्ठ 37) मार्क्स जैसे चिंतक ने भारत की प्रशंसा की थी और अपने पंथों का स्रोत बताया था, उसी भारत में पश्चिमी देशों की सभ्यता आधुनिकता के बहाने समाज की गुणवत्ता समाप्त कर रही है।
संप्रति भारत के लोगों में आधुनिक हो जाने की जल्दबाजी है। समाज के गठन की मूल इकाई परिवार है। इस परिवार में पति और पत्नी परस्पर एक दूसरे की प्रसन्नता के लिए काम करते हैं। वैदिक साहित्य में पत्नी को घर का सम्राट बताया गया है। घर की प्रीति प्राचीन काल में सबको खींचती थी। घर का मतलब ही है जहां बार-बार लौटने का मन करे वह घर है। परिवार के सभी जन परस्पर प्रेम करते हैं और अपना घर का काम भी मिलजुल कर करते हैं। पति-पत्नी का साहचर्य अद्भुत है। ऋग्वेद में बताते हैं कि पति और पत्नी मिलकर सोम रस तैयार करते हैं। पति और पत्नी मिलकर अपने घर भद्र जनों को निमंत्रण देते हैं।
पति और पत्नी अलग-अलग नहीं हैं। दोनों मिलकर एक हैं। भारतीय परंपरा में दोनों के जोड़े को मिलाकर दम्पति कहा गया है। दम्पति में स्त्री पुरुष दोनों समाहित हैं। दो को एक देखने की दृष्टि दाम्पत्य में है। दाम्पत्य जैसा शब्द दुनिया की किसी भाषा में नहीं है। वेदों में भी धरती और आकाश के लिए मिला-जुला एक शब्द है 'रोदसी'। ऋग्वेद में बताते हैं, ''धरती और आकाश पहले मिले हुए थे और एक थे। मरुदगणों ने धरती और आकाश को अलग कर दिया।'' विशेष संस्कृति के कारण भारतीय विवाह स्थाई रहते हैं। वैवाहिक सम्बंध टूटने की ज्यादातर घटनाएं पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में हुई हैं और होती हैं। विदेशी सभ्यता के प्रभाव में बिना विवाह के स्त्री पुरुष को साथ-साथ रहना है। अंग्रेजी भाषांतर में इसे 'लिव इन' कहा गया। 'लिव इन' भारतीय धारणा नहीं है। 'लिव इन' विदेशी उधार की आधुनिकता का परिणाम है। तरुणाई में ऊर्जा का अतिरेक होता है। अनुभव कम होते हैं। इसलिए 'लिव इन' की घटनाएं होती हैं। 'लिव इन' टूटता है। स्त्री और पुरुष दोनों ठगे-ठगे रह जाते हैं। भारत में विवाह के समय अग्नि के सात चक्कर लगाना अनिवार्य किया गया है। भारत की विवाह पद्धति, पारिवारिक नेह और स्नेह, घर चलाने का अनूठा संविधान है। इसे पश्चिमी सभ्यता के हमले से बचाना चाहिए।
ऋग्वेद में सूर्य पुत्री सूर्या के विवाह का वर्णन है। बताते हैं कि गांव नगर के सभी वरिष्ठ बहू के स्वागत के लिए एकत्रित होते हैं। वरिष्ठ जनों के आशीष का भाव बार-बार पढ़ने लायक है। ऋषि कहते हैं कि यह बहू पूरे परिवार के सुख का कारण बने। सास ससुर की सेवा करे। सब पर नियंत्रण करे। घर में इसी बहू का राज्य चले। यह बहू अखण्ड सौभाग्यवती हो। इसके बच्चे परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ाएं। पश्चिम के विवाह में भारतीय संस्कृति नहीं है। पश्चिमी जीवनशैली में व्यक्तिवाद है। भारत के जीवन में सामूहिकता है। उधार की आधुनिकता व्यक्तिवाद बढ़ाती है। व्यक्तिवाद में माता-पिता और परिवार के सदस्य अपनी उपयोगिता के अनुसार सम्मान पाते हैं। यहां माता-पिता की उपयोगिता नहीं देखी जाती। भारतीय जीवनशैली में समूह का हित, समाज का हित और राष्ट्रहित मिलते हैं। संस्कृति में सत्य, शिव और सुंदर का प्रवाह है।
लेखक:- हृदयनारायण दीक्षित
आपकी आत्मा, हृदय और कलेजा काँप उठेगा, जब एक क्रांतिकारी की मार्मिक एवं दर्दनाक कहानी पढ़ेंगे, जिन्हें आजाद भारत में न नौकरी मिली, न ईलाज!-कृपया पढ़ें और विचार व्यक्त करें! क्या ये आतंकवादी थे? न्याय करें!
